Saturday, February 7, 2026
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2026 की महाशिवरात्रि क्यों है खास ? इस दिन भूलकर भी न करें ये 6 काम… नहीं तो जीवन भर रहेंगे परेशान

महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र और आध्यात्मिक पर्वों में से एक मानी जाती है। यह केवल पूजा-पाठ का दिन नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि, साधना और शिव तत्व से जुड़ने का विशेष अवसर होता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई आराधना से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

कब है 2026 में महाशिवरात्रि ?

साल 2026 में महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। यह पर्व फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि के संयोग पर आता है। तिथि की शुरुआत 15 फरवरी को शाम 5 बजकर 04 मिनट से होगी और समापन 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर होगा। इसी दिन देशभर के शिव मंदिरों में विशेष पूजा, अभिषेक और रात्रि जागरण किया जाएगा।

महाशिवरात्रि 2026 क्यों मानी जा रही है खास ?

महाशिवरात्रि 2026 अत्यंत शुभ मानी जा रही है क्योंकि इस दिन पूरे समय व्यतीपात योग बना रहेगा, जिसे साधना और तप के लिए प्रभावशाली योग माना जाता है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग भी रहेगा, जो पूजा-पाठ और मंत्र जाप के लिए शुभ माना रहा है।

क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि ?

शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। एक अन्य मान्यता यह भी है कि इसी रात्रि भगवान शिव शिवलिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे। योग शास्त्रों में इस रात्रि को विशेष माना गया है, क्योंकि इस समय शिव तत्व सबसे अधिक सक्रिय होता है और साधना शीघ्र फल देती है।

महाशिवरात्रि पर भूलकर न करें ये काम

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भूलकर भी ये काम न करें, नहीं तो इससे आपके जीवन में परेशानी आ सकती है।

हल्दी शिवलिंग पर न करें अर्पित

हल्दी शुभ मानी जाती है, लेकिन शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित है। शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है, इसलिए हल्दी अर्पित नहीं की जाती।

तुलसी के पत्ते शिवलिंग पर न चढ़ाएं

तुलसी पूजनीय है, लेकिन शिवलिंग पर नहीं चढ़ाई जाती। मान्यता है कि तुलसी के पति जालंधर का वध भगवान शिव ने किया था।

नारियल न करें अर्पित

नारियल को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है, इसलिए शिवलिंग पर नारियल चढ़ाने की मनाही है।

टूटे चावल को अर्पित करने से बचें

भगवान शिव को अक्षत (साबुत चावल) प्रिय हैं। टूटे चावल अर्पित करने से बचना चाहिए।

केतकी का फूल न करें अर्पित

पौराणिक कथा के अनुसार केतकी के फूल ने ब्रह्मा जी के साथ मिलकर झूठी गवाही दी थी, इसलिए भगवान शिव ने केतकी के फूल को श्राप दिया कि शिव पूजन में केतकी के फूल को अर्पित नहीं किया जाएगा।

लाल रंग के फूल शिव पूजन में न चढ़ाएं

लाल रंग उग्रता का प्रतीक है। भगवान शिव को सफेद रंग के फूल अधिक प्रिय हैं, इसलिए लाल फूल न चढ़ाएं।

महाशिवरात्रि पर क्या करें अर्पित ?

महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी के फूल और सफेद पुष्प अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कच्चे दूध, गंगाजल और चंदन से किया गया अभिषेक नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और जीवन में शांति व समृद्धि लाता है।

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