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सर्दियों में प्रदूषण क्यों बढ़ता है ? जानिए कारण और बचाव के उपाय
Monday, February 9, 2026
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सर्दियों में प्रदूषण क्यों बढ़ता है ? जानिए कारण और बचाव के उपाय

देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर वायु प्रदूषण के गंभीर संकट का सामना कर रही है। पिछले छह दिनों से दिल्ली की हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है। आज, 29 नवंबर को सुबह 7 बजे, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 332 मापा गया। कई इलाकों में यह आंकड़ा 400 के पार पहुंच चुका है, जिससे स्थिति और चिंताजनक हो गई है।

दिल्ली और NCR के प्रदूषण स्तर

दिल्ली के प्रमुख क्षेत्रों में AQI निम्नलिखित स्तर पर है:

  • अलीपुर: 358
  • आनंद विहार: 393
  • बवाना: 432 (गंभीर श्रेणी)
  • शादीपुर: 397
  • विवेक विहार: 394

एनसीआर में भी हालात बिगड़ रहे हैं:

  • ग्रेटर नोएडा: 272
  • गाजियाबाद: 258
  • नोएडा: 249
  • गुरुग्राम: 258
  • फरीदाबाद: 166

कैसे मापी जाती है वायु गुणवत्ता?

एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) को विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है:

  • 0-50: अच्छा
  • 51-100: संतोषजनक
  • 101-200: मध्यम
  • 201-300: खराब
  • 301-400: बहुत खराब
  • 401-500: गंभीर

दिल्ली के कई इलाकों में AQI 300 से ऊपर होने के कारण स्थिति “बहुत खराब” है। यह सांस संबंधी समस्याओं, हृदय रोग, और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

ठंड बढ़ने के साथ प्रदूषण भी बढ़ा

दिल्ली में अब ठंड का असर भी नजर आने लगा है। गुरुवार की रात इस सीजन की सबसे ठंडी रात दर्ज की गई, जब न्यूनतम तापमान 10.1°C तक गिर गया। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में ठंड और कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है, जो वायु प्रदूषण को और गंभीर बना सकती है।

प्रदूषण के स्वास्थ्य पर प्रभाव

वायु प्रदूषण से श्वसन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है। इससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोग जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह स्थिति विशेष रूप से खतरनाक हो सकती है।

स्थिति सुधारने के उपाय

  • वाहनों का कम उपयोग: सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ाएं।
  • ग्रीन एनर्जी का प्रयोग: सौर ऊर्जा और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करें।
  • पेड़ लगाना: वायु की गुणवत्ता सुधारने के लिए वृक्षारोपण करें।
  • मास्क का उपयोग: प्रदूषण से बचने के लिए N95 मास्क का उपयोग करें।
  • सरकारी प्रयास: निर्माण गतिविधियों पर रोक और औद्योगिक उत्सर्जन को नियंत्रित करने की आवश्यकता है।
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