Monday, February 9, 2026
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Uttar Pradesh : यूपी बीजेपी का नया अध्यक्ष कौन? किसके नाम पर लगेगी मुहर

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के संगठनात्मक ढांचे में बड़ा परिवर्तन होने वाला है। पार्टी के आंतरिक स्रोतों के मुताबिक, नए राज्य अध्यक्ष का नाम तय हो चुका है और अगले कुछ दिनों में इसका औपचारिक ऐलान हो सकता है। वर्तमान अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी का कार्यकाल जनवरी 2024 में समाप्त हो चुका था, लेकिन संगठन चुनावों की प्रक्रिया के तहत अब यह फैसला अंतिम रूप ले चुका है। पंचायत चुनावों और 2027 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी जल्द ही नई कमान सौंपना चाहती है।

प्रक्रिया पूरी, लिफाफा खुलने का समय

पार्टी के महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन महामंत्री बीएल संतोष से मुलाकात कर चुके हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेताओं के साथ भी लखनऊ में बंद कमरों की बैठकें हो चुकी हैं, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक व केशव प्रसाद मौर्य और वर्तमान अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी भी मौजूद थे। इन बैठकों में नाम पर अंतिम मुहर लग चुकी है।

15 दिसंबर से पहले नाम का होगा ऐलान

अगला कदम यूपी के सभी जिलों के चुनाव अधिकारियों, जिलाध्यक्षों और महानगर अध्यक्षों को लखनऊ बुलाना है। यहां राज्य चुनाव अधिकारी पीयूष गोयल प्रस्ताव रखेंगे, जिस पर सहमति बनेगी। हालांकि, यह प्रक्रिया औपचारिक मानी जा रही है, क्योंकि केंद्र से आने वाले नाम पर विरोध की गुंजाइश न के बराबर है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि 15 दिसंबर से पहले ऐलान हो सकता है, क्योंकि उसके बाद खरमास (16 दिसंबर से 14 जनवरी) का समय आता है, जिसमें शुभ कार्य टाले जाते हैं।

अटकलों का दौर: कौन बनेगा सरताज?

राजनीतिक गलियारों में अटकलें जोरों पर हैं। मुख्य सवाल वर्ग, क्षेत्र, गुट और लिंग से जुड़े हैं। पार्टी समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले का जवाब देने के लिए जातिगत संतुलन बनाए रखना चाहती है।

ब्राह्मण चेहरा?

पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा (लखनऊ, राज्यसभा सांसद) और पूर्वांचल के हरीश द्विवेदी (बस्ती सांसद, राष्ट्रीय सचिव) सबसे आगे हैं। महेंद्र नाथ पांडेय के दो बार ओबीसी अध्यक्ष रहने से ब्राह्मण उम्मीदवार की चर्चा तेज है।

ओबीसी अगुवाई?

साध्वी निरंजन ज्योति (पूर्व केंद्रीय मंत्री, निषाद समाज), बीएल वर्मा (केंद्रीय मंत्री, बुंदेलखंड लोधी), धर्मपाल सिंह (राज्य मंत्री, पश्चिमी यूपी लोधी) और अमरपाल मौर्य (राज्यसभा सांसद) के नाम प्रमुख। यह सपा के पीडीए को काउंटर करने की रणनीति हो सकती है।

दलित दांव?

विद्यासागर सोनकर (विधान परिषद सदस्य), रामशंकर कठेरिया (पूर्व केंद्रीय मंत्री, आगरा-इटावा सांसद) और कांता कर्दम (राज्यसभा सांसद, जाटव समाज, महिला) पर विचार

इसी के साथ ही पार्टी के एक धड़े का मानना है कि चर्चित नामों के बजाय कोई सरप्राइज चेहरा आ सकता है, लेकिन वह निश्चित रूप से संघ-बीजेपी का पुराना कार्यकर्ता होगा। दूसरे दलों से आए नेताओं को संगठन की कमान देने की संभावना कम है।

पृष्ठभूमि: क्यों जरूरी है यह बदलाव?

2024 लोकसभा चुनावों में यूपी में बीजेपी की सीटें 62 से घटकर 33 रह गईं, जिसके बाद संगठन सुधारों की कवायद शुरू हुई। नवंबर 2024 से बूथ समितियों के चुनाव हुए, दिसंबर में मंडल अध्यक्ष चुने गए और मार्च 2025 में 70 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति हुई, जिनमें ऊपरी जातियां हावी रहीं। अब राज्य स्तर पर यह कदम 2026 पंचायत और 2027 विधानसभा चुनावों के लिए तैयारियां तेज करेगा।

जैसे ही लिफाफा खुलेगा, यूपी की सियासत में नया अध्याय शुरू होगा। क्या ब्राह्मण, ओबीसी या दलित चेहरा बनेगा सरताज? इंतजार की घड़ी समाप्त होने वाली है।

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