Sunday, February 8, 2026
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क्या है ई-सिगरेट से जुड़ा विवाद ?, सांसद अनुराग ठाकुर के सवाल पर सदन में बवाल

लोकसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान गुरुवार को उस समय सदन में हलचल मच गई, जब BJP सांसद अनुराग ठाकुर ने संसद के भीतर ई-सिगरेट पीने के मुद्दे पर गंभीर मामला उठाया। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन संकेत TMC के एक सांसद की ओर था। अनुराग ठाकुर ने कहा कि, “संसद वह स्थान है, जहां देश के करोड़ों लोग उम्मीद के साथ देखते हैं। यहां ऐसा कोई आचरण बर्दाश्त नहीं होना चाहिए जो संसदीय मर्यादा और अनुशासन के खिलाफ हो।”

अनुराग ठाकुर ने की जांच की मांग

अनुराग ठाकुर ने इस मामले पर गंभीरता से विचार करने और जांच कराने की मांग की। उनका कहना था कि सदन की कार्यवाही के दौरान ऐसी गतिविधियां न सिर्फ नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं।

स्पीकर ओम बिरला ने कही ये बात

मामले के सामने आते ही सदन की निगाहें लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर मुड़ गईं। उन्होंने कहा कि संसद में किसी भी सदस्य को किसी प्रकार की छूट या विशेषाधिकार नहीं दिया गया है, जिसमें ई-सिगरेट, धूम्रपान या कोई अन्य प्रतिबंधित गतिविधि शामिल हो। साथ ही, “नियम सभी सांसदों पर समान रूप से लागू होते हैं। सदन की गरिमा बनाए रखना प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी है।” उन्होंने यह भी कहा कि अब तक कोई औपचारिक शिकायत या सबूत उनके पास नहीं पहुंचे हैं, लेकिन अगर ऐसा कोई मामला सामने आता है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

क्या है ई-सिगरेट?

ई-सिगरेट एक बैटरी से चलने वाला इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जो निकोटीन ई-लिक्विड को गर्म करके भाप में बदलता है। बता दें कि यह भी साधारण सिगरेट की तरह ही नशे की लत पैदा करता है, लेकिन इसे कम हानिकारक समझने की गलती लोग अक्सर करते हैं।

क्यों प्रतिबंध है ई-सिगरेट?

भारत सरकार ने 2019 में ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाया था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि युवाओं में यह गलतफहमी फैल रही थी कि ई-सिगरेट नुकसान नहीं पहुंचाती, जबकि वैज्ञानिक अध्ययन इसके उलट है।

किस अधिनियम के तहत प्रतिबंध?

‘इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019’ के तहत भारत में ई-सिगरेट का उत्पादन, बिक्री, आयात, निर्यात और विज्ञापन गैरकानूनी है। उल्लंघन पर जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान है।

ICMR की चेतावनी

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ICMR के अनुसार, ई-सिगरेट का रोजाना इस्तेमाल से हार्ट अटैक के खतरे को 79% तक बढ़ा सकता है। इनमें निकेल, टिन और सीसा जैसी भारी धातुएं होती हैं, जो कैंसर, DNA क्षति और फेफड़ों के रोग का कारण बन सकती हैं।

कैसे काम करती है ई-सिगरेट ?

  • ई-सिगरेट में एक बैटरी होती है, जो इसमें लगे हीटिंग एलिमेंट को ऊर्जा देते हैं, जिससे ‘ई-लिक्विड’ गर्म होकर भाप में बदल जाता है।
  • बता दें कि ई-लिक्विड में निकोटीन, फ्लेवर और रासायनिक तत्व होते हैं, फिर व्यक्ति भाप को सांस के जरिए अंदर लेता है।

ई-लिक्विड में क्या होता है ?

ई-लिक्विड में निकोटीन मौजूद होता है, जिसके कारण लोगों लत लगती है। इसके साथ ही, प्रोपलीन ग्लाइकोल और वेजिटेबल ग्लिसरीन भी मौजूद होता है।

ई-सिगरेट के कितने प्रकार ?

ई-सिगरेट आमतौर पर चार प्रकार की होती हैं। आइए जानते हैं-

  • डिस्पोजेबल ई-सिगरेट : एक बार उपयोग के बाद फेंक दी जाती हैं।
  • रिफिलेबल डिवाइस : इन्हें चार्ज और रीफिल किया जा सकता है।
  • पॉड सिस्टम : यह ऐसे लोगों के लिए बनाए गए हैं, जो सरल और कम रखरखाव वाला वेपिंग डिवाइस इस्तेमाल करना पसंद करते हैं।
  • मॉड्स : इन डिवाइसों का आकार बड़ा और भारी होता है और इनका डिजाइन आमतौर पर बॉक्स जैसी आकार में होता है।
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