Sunday, February 8, 2026
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बांग्लादेश में हिंसा: शेख हसीना का गुस्सा फूटा, युनूस सरकार को दी कड़ी चेतावनी

बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती जा रही है। हाल ही में ढाका स्थित देश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान के घर पर हुए हमले ने इस संकट को और गहरा कर दिया है। प्रदर्शनकारियों के एक बड़े समूह ने बुधवार को उनके आवास पर तोड़फोड़ की और आग लगा दी, जिससे देश में तनाव और बढ़ गया है। यह घटना उस समय हुई जब उनकी बेटी और अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ऑनलाइन माध्यम से लोगों को संबोधित कर रही थीं।

बुलडोजर जुलूस और हिंसा की लहर

जैसे ही यह सूचना मिली कि बुधवार रात 9 बजे शेख हसीना एक ऑनलाइन संबोधन देने वाली हैं, विरोधियों ने अपनी गतिविधियां तेज कर दीं। सोशल मीडिया पर ‘बुलडोजर जुलूस’ का आह्वान किया गया, जिसके बाद राजधानी के धानमंडी इलाके में स्थित शेख मुजीबुर रहमान के घर के सामने हजारों लोग एकत्र हो गए। जैसे ही हसीना का संबोधन शुरू हुआ, प्रदर्शनकारियों ने हिंसा फैलानी शुरू कर दी और घर में तोड़फोड़ और आगजनी कर दी।

शेख मुजीबुर रहमान की हत्या 1975 में कर दी गई थी, और उनके ढाका स्थित आवास को एक स्मारक संग्रहालय में बदल दिया गया था। इस ऐतिहासिक स्थल पर हुए इस हमले से बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल और बढ़ गई है।

शेख हसीना की प्रतिक्रिया: ‘क्या मैंने आपके लिए कुछ नहीं किया?’

शेख हसीना, जो आवामी लीग की अब भंग हो चुकी छात्र शाखा ‘छात्र लीग’ के एक कार्यक्रम में भाषण दे रही थीं, इस हमले की खबर सुनते ही गुस्से में आ गईं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “क्या मैंने आपके लिए कुछ नहीं किया? क्या मैंने काम नहीं किया? तो फिर मेरे उस घर में क्यों तोड़फोड़ की गई जहां से मेरे पिता ने आजादी का नारा दिया था? मुझे इंसाफ चाहिए।”

हसीना ने वर्तमान सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि वे संविधान और राष्ट्रीय ध्वज को नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि “वे इमारत को ध्वस्त कर सकते हैं, लेकिन इतिहास को नहीं। उन्हें यह भी याद रखना चाहिए कि इतिहास अपना बदला लेता है।”

बांग्लादेश में बदले हालात

पिछले साल बांग्लादेश में छात्र आंदोलनों ने बड़ा रूप लेते हुए शेख हसीना सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था। इसके चलते उन्हें देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी। मौजूदा समय में हसीना भारत में रह रही हैं, जबकि उनके राजनीतिक दल ‘आवामी लीग’ के अधिकतर नेता या तो जेल में बंद हैं, देश छोड़कर भाग चुके हैं, या छिपे हुए हैं।

बांग्लादेश में आवामी लीग के कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिससे देश में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ गई है।

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