Sunday, February 8, 2026
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Uttarakhand को केंद्र के बजट से मिलेगी राहत ? कुंभ के लिए मिल सकता है स्पेशल पैकेज

रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण दिल्ली में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करने जा रही हैं। इस बजट को लेकर उत्तराखंड को खास उम्मीदें हैं, क्योंकि वर्ष 2027 में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले सरकार विकास कार्यों को और गति देना चाहती है। फिलहाल उत्तराखंड में केंद्र सरकार की सहायता से करीब साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विकास योजनाएं चल रही हैं, जिनका असर सड़क, रेल और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं पर साफ दिख रहा है। राज्य सरकार की अपेक्षा है कि चारधाम यात्रा मार्गों और सीमावर्ती इलाकों की कनेक्टिविटी को और मजबूत किया जाएगा।

साथ ही बागेश्वर-कर्णप्रयाग और रामनगर-कर्णप्रयाग जैसी प्रस्तावित रेल परियोजनाओं के सर्वे को आगे बढ़ाया जाए और पहले से चल रही बड़ी योजनाओं के लिए केंद्र से लगातार सहयोग मिलता रहे। इसके अलावा कुंभ मेले के लिए विशेष पैकेज की मांग भी की गई है, जिस पर किसी बड़े ऐलान की संभावना जताई जा रही है। वहीं आम जनता की निगाहें भी बजट पर टिकी हैं। नौकरीपेशा वर्ग टैक्स में राहत की उम्मीद कर रहा है, व्यापारी GST प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग कर रहे हैं और निवेशकों को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स पर सरकार के फैसले का इंतजार है।

बजट से आम उत्तराखंडी की अपेक्षाएं

बुनियादी सुविधाओं पर खर्च और टैक्स में राहत, इस बार के बजट की उम्मीद है। बैंकर्स एम्प्लॉई यूनियन के महामंत्री जगमोहन मेंदिरत्ता का कहना है कि राज्य में बजट और सड़क परियोजनाओं के बावजूद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों तक इसका पूरा लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। कई इलाकों में आज भी पानी और सीवर की पाइपलाइनें बेहद पुरानी हैं, जिससे सड़कों पर सीवर बहने जैसी समस्याएं बनी रहती हैं।

उनका कहना है कि सड़क, बिजली, पेयजल और सीवर जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए अलग से ठोस बजट प्रावधान किए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सर्विस क्लास को मिलने वाली टैक्स छूट को महंगाई के अनुरूप बढ़ाया जाना जरूरी है, क्योंकि लगातार बढ़ती कीमतों के बीच मौजूदा राहत लंबे समय तक असरदार नहीं रह पाती।

GST नियमों में ढील और व्यापारियों को सहूलियत

दून वैली व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष जसपाल छाबड़ा और दून उद्योग व्यापार मंडल के महासचिव सुनील मैसॉन ने व्यापारियों के लिए GST नियमों को आसान बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि उत्तराखंड में कंपोजिशन स्कीम और GST रजिस्ट्रेशन की सीमा अन्य राज्यों की तुलना में कम है, जिससे छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ता है।

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