Sunday, February 8, 2026
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US–Venezuela Crisis: मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दुनिया दो खेमों में बंटी, भारत ने दिया संतुलित संदेश

वेनेजुएला में शनिवार को हुए ताबड़तोड़ हमलों के बाद अमेरिका ने बड़ा कदम उठाते हुए वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया। अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल आ गया है। इस एक्शन को लेकर पूरी दुनिया दो खेमों में बंटी नजर आ रही है। एक तरफ कई देश अमेरिका की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ देश खुलकर अमेरिका के समर्थन में सामने आए हैं।

अमेरिका की कार्रवाई पर बढ़ा वैश्विक तनाव

अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के खिलाफ की गई इस कार्रवाई के बाद वैश्विक मंच पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई देशों का कहना है कि किसी संप्रभु देश के राष्ट्रपति को हिरासत में लेना अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सीधा उल्लंघन है। वहीं समर्थक देशों का तर्क है कि यह कदम लोकतंत्र, मानवाधिकारों और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी था।

इन देशों ने की अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना

अमेरिका के एक्शन की कड़ी आलोचना करने वाले देशों में शामिल हैं- रूस, चीन, ईरान, क्यूबा, ब्राजील, मेक्सिको, कोलंबिया, चिली, बेलारूस, उरुग्वे, स्लोवाकिया, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, श्रीलंका, उत्तर कोरिया, घाना और सिंगापुर। इन देशों ने अमेरिका की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए इसकी निंदा की है। खास बात यह है कि अमेरिका के भीतर भी ट्रंप सरकार के इस फैसले को लेकर विरोध के स्वर उठ रहे हैं और कई राजनीतिक व मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम पर सवाल खड़े किए हैं।

अमेरिका को इन देशों का मिला समर्थन

दूसरी ओर कुछ देश ऐसे भी हैं जो वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। इनमें- अर्जेंटीना, इजरायल, पेरू, अल साल्वाडोर, इक्वाडोर, अल्बानिया, फ्रांस और ब्रिटेन शामिल हैं। इन देशों का कहना है कि वेनेजुएला में लंबे समय से लोकतांत्रिक संस्थाओं का दमन हो रहा है और अमेरिका की कार्रवाई वहां लोकतांत्रिक बदलाव की दिशा में एक कदम है।

भारत ने अपनाया संतुलित और सधा रुख

भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद संतुलित प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने किसी भी पक्ष का खुला समर्थन या विरोध करने से बचते हुए शांति और संवाद पर जोर दिया है। MEA ने अपने बयान में कहा, “वेनेजुएला में हाल की घटनाएं गहरी चिंता का विषय हैं। भारत बदलते हालात पर करीबी नजर रख रहा है। हम वेनेजुएला के लोगों की भलाई और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। सभी संबंधित पक्षों से अपील है कि वे बातचीत और कूटनीति के जरिए इस मुद्दे को सुलझाएं, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।”

विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि काराकास स्थित भारतीय दूतावास वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के संपर्क में है और उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
इटली की PM जॉर्जिया मेलोनी का बयान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि वह वेनेजुएला में हो रहे घटनाक्रम पर शुरू से ही नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि इटली ने अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर मादुरो द्वारा घोषित चुनावी जीत को कभी मान्यता नहीं दी और वेनेजुएला सरकार के दमनकारी कदमों की लगातार निंदा की है।

मेलोनी ने यह भी कहा कि इटली की पुरानी नीति के अनुसार तानाशाही शासन को खत्म करने के लिए बाहरी सैन्य हस्तक्षेप सही रास्ता नहीं है, लेकिन यदि किसी देश की सुरक्षा पर हाइब्रिड अटैक, ड्रग तस्करी या संगठित अपराध का खतरा हो, तो बचाव के तौर पर दखल को जायज़ माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला में रह रहे इटालियन नागरिकों की सुरक्षा उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

ऑस्ट्रेलिया ने बातचीत और कूटनीति पर दिया जोर

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार वेनेजुएला में हो रहे घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रही है। अल्बनीज ने कहा, “हम सभी पक्षों से अपील करते हैं कि वे तनाव को बढ़ने से रोकें और बातचीत व डिप्लोमेसी का रास्ता अपनाएं। ऑस्ट्रेलिया लंबे समय से वेनेजुएला में लोकतंत्र, मानवाधिकार और बुनियादी स्वतंत्रताओं को लेकर चिंता जताता रहा है।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय कानून और वेनेजुएला में शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक बदलाव का समर्थन करता रहेगा। साथ ही वेनेजुएला में मौजूद ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के लिए 24/7 इमरजेंसी कांसुलर सहायता के हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।

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