Monday, February 9, 2026
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CM भगवंत मान सरकार के दिशा निर्देशों से हो रही है मंडी गोबिंदगढ़ में 20,000 करोड़ के निवेश की तैयारी

पंजाब आज देश के सबसे तेज़ी से बढ़ते ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है। मज़बूत सरकारी समर्थन, बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता के दम पर राज्य अब दुनिया की बड़ी ऑटोमोटिव कंपनियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। और यह सब इस बात का सबूत है कि पंजाब अब ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री के नक्शे पर अपनी मज़बूत जगह बना चुका है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान की दूरदर्शी सोच और सक्रिय नेतृत्व ने पंजाब को निवेशकों के लिए सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन बना दिया है। मंडी गोबिंदगढ़ में BMW के पार्ट्स बनाने वाला अत्याधुनिक प्लांट अगले महीने से शुरू होने जा रहा है, जहां करीब 150 करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। यह प्लांट BMW के लिए 2.5 मिलियन यूनिट पार्ट्स का उत्पादन करेगा। यह प्रोजेक्ट न सिर्फ पंजाब की औद्योगिक क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि राज्य अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्वालिटी और टेक्नोलॉजी में माहिर है।

पंजाब सरकार ने निवेशकों के लिए ‘रियल सिंगल विंडो सिस्टम’ लागू किया है, जो उन्हें हर तरह की सुविधा और सपोर्ट एक ही जगह से उपलब्ध कराता है। इस सिस्टम के तहत कंपनियों को लाइसेंस, परमिट और अन्य अप्रूवल मिलने में कोई देरी नहीं होती। मुख्यमंत्री ने खुद यह सुनिश्चित किया है कि राज्य में आने वाली हर कंपनी को पूरा सहयोग मिले और उन्हें किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। औद्योगिक शांति, स्किल डेवलपमेंट और एक्सपोर्ट बढ़ाने पर सरकार का फोकस साफ दिखता है, जो निवेशकों के लिए बेहद आकर्षक है।

राज्य की नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी के तहत ऑटो और ऑटो कंपोनेंट्स सहित विभिन्न सेक्टर्स के लिए सेक्टर-स्पेसिफिक कमेटियां बनाई जा रही है। इन कमेटियों का मकसद है कि एडवांस टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को बढ़ावा दिया जाए, ताकि बड़ी कंपनियों के साथ-साथ लोकल MSME यूनिट्स भी ग्लोबल मार्केट में कंपीट कर सकें। यह पहल छोटे उद्यमियों और स्टार्टअप्स के लिए खास तौर पर फायदेमंद साबित होगी, क्योंकि उन्हें टेक्निकल सपोर्ट, ट्रेनिंग और मार्केट एक्सेस में सरकारी मदद मिलेगी।

पंजाब का ऑटो कंपोनेंट सेक्टर अब सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहा है। यहां बने प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट लगातार बढ़ रहा है, जिससे राज्य को विदेशी मुद्रा मिल रही है और नए बिजनेस के मौके खुल रहे है। देश की कुल ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री का 7 फीसदी हिस्सा पंजाब में बनता है, और नई पॉलिसी और निवेश से यह आंकड़ा आने वाले सालों में और बढ़ने वाला है। यह ग्रोथ राज्य की इकोनॉमी को मज़बूत करने के साथ-साथ युवाओं को रोज़गार के हज़ारों नए मौके दे रही है।

फॉरेन इन्वेस्टमेंट के मामले में भी पंजाब अब एक आकर्षक डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। 2025 में ऑटो सेक्टर में 15,000 से 20,000 करोड़ रुपए का नया निवेश आने का अनुमान है, जो स्थानीय उद्योगों की प्रोडक्शन कैपेसिटी और टेक्निकल इनोवेशन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। यह भारी निवेश न सिर्फ बड़ी कंपनियों को बल्कि छोटे वेंडर्स और सप्लायर्स को भी फायदा पहुंचाएगा, क्योंकि इससे पूरी सप्लाई चेन मज़बूत होगी।

पंजाब का ऑटो कंपोनेंट हब देश की इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री के लिए भी बेहद अहम है। राज्य की कंपनियां EV पार्ट्स, स्मार्ट ट्रांसमिशन सिस्टम और ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में शानदार काम कर रही है। जैसे-जैसे देश इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ रहा है, पंजाब इस बदलाव में लीडिंग रोल निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। यहां की कंपनियां सस्टेनेबल और फ्यूचर-रेडी सॉल्यूशंस बना रही है, जो न सिर्फ भारत बल्कि विदेशों में भी डिमांड में है।

स्थानीय युवाओं के लिए यह विकास एक सुनहरा मौका लेकर आया है। ऑटो कंपोनेंट सेक्टर में हजारों नई नौकरियां क्रिएट हो रही हैं, जिनमें इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, क्वालिटी कंट्रोल, लॉजिस्टिक्स और मैनेजमेंट जैसे विभिन्न फील्ड्स शामिल है। सरकार स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स के जरिए युवाओं को इंडस्ट्री की ज़रूरतों के हिसाब से ट्रेनिंग दे रही है, ताकि वे आसानी से अच्छी नौकरी पा सकें। यह न सिर्फ युवाओं के करियर के लिए बल्कि राज्य की समग्र प्रगति के लिए भी बेहद ज़रूरी है।

सरकार के मज़बूत समर्थन, प्रोग्रेसिव पॉलिसी और इंडस्ट्री की आधुनिक सोच के चलते पंजाब की ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री आज इनोवेशन, ग्लोबल कंपटीशन और सस्टेनेबल एम्प्लॉयमेंट जनरेशन का आदर्श मॉडल बन गई है। BMW जैसी दुनिया की नामी कंपनियां जब पंजाब में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाती है, तो यह राज्य की क्रेडिबिलिटी और पोटेंशियल का सबसे बड़ा प्रमाण है। पंजाब अब सिर्फ कृषि प्रधान राज्य नहीं रहा, बल्कि एक इंडस्ट्रियल पावरहाउस के रूप में अपनी नई पहचान बना रहा है, जो आने वाले दशकों में देश की इकोनॉमी में अहम योगदान देगा।

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