Monday, February 9, 2026
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झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए: भारत के दबाव के बाद पहली बार UNSC में शामिल हुआ…

कौन कहता है कि एक अकेला व्यक्ति पूरी दुनिया को झुका नहीं सकता? …यह संभव है, लेकिन इसके लिए हौसले बुलंद और दिल नेक होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षों में जिस तरह से दुनिया के मन में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है, उसे कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता। पीएम मोदी ने अपने अमेरिकी दौरे के दौरान एक संबोधन में कहा था- कि यह आज का भारत है और जब भारत बोलता है, तो दुनिया सुनती है। पीएम मोदी की यह बात एक बार फिर सच साबित हुई है। अब भारत बोल रहा है और दुनिया की सबसे बड़ी संस्था संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) सुन रही है।

भारत द्वारा बार-बार आवाज उठाने के बाद पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद दबाव में आई है। नतीजतन पहली बार लिखित रूप में यूएनएससी में सुधारों की पहल शुरू हुई है। यूएनएससी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता समेत अन्य सुधारों को लेकर पहली बार एक विस्तृत पैराग्राफ शामिल किया है। भारत ने यूएनएससी की इस पहल की सराहना की है। भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन के दस्तावेज में पहली बार सुरक्षा परिषद सुधार पर एक विस्तृत पैराग्राफ शामिल किया जाना एक “अच्छी शुरुआत” है और नई दिल्ली को उम्मीद है कि 15 देशों के निकाय में सुधार के लिए एक निश्चित समय सीमा के भीतर ‘पाठ-आधारित वार्ता’ शुरू हो जाएगी।

पहली बार संयुक्त राष्ट्र को एक विस्तृत पैराग्राफ शामिल करना पड़ा

गौरतलब है कि ‘पाठ-आधारित वार्ता’ से तात्पर्य किसी समझौते के ऐसे विषय को तैयार करने की प्रक्रिया से है जिसे सभी पक्ष स्वीकार करने और हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हों। रविवार को ‘भविष्य के शिखर सम्मेलन’ के पहले दिन, विश्व नेताओं ने सर्वसम्मति से “भविष्य के समझौते” को स्वीकार किया, जिसमें “सुरक्षा परिषद में सुधार, इसके प्रतिनिधित्व को बढ़ाने, इसे अधिक समावेशी, पारदर्शी, कुशल, प्रभावी, लोकतांत्रिक और जवाबदेह बनाने” का वादा किया गया है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने लंबे समय से लंबित सुरक्षा परिषद सुधारों के संबंध में ‘भविष्य के समझौते’ की भाषा को “अभूतपूर्व” बताया है।

यह पूछे जाने पर कि भारत “भविष्य के समझौते” में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार की भाषा को किस तरह देखता है, विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, “मैं आपका ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित करना चाहूंगा कि पहली बार संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन के दस्तावेज में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार पर एक विस्तृत पैराग्राफ शामिल किया गया है। “इसलिए भले ही इसमें हर उस क्षेत्र का विवरण न हो जिसकी हम कल्पना करते हैं या जिसे हम चाहते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि यह एक अच्छी शुरुआत है।” मिसरी ने कहा कि भारत “आखिरकार एक निश्चित समय सीमा में पाठ-आधारित वार्ता शुरू करने की उम्मीद करता है।” उन्होंने कहा, “लेकिन इसे उस उद्देश्य की ओर पहला कदम माना जाना चाहिए।”

विदेश मंत्रालय ने पीएम मोदी की यात्रा को सफल बताया

यह कदम संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में सुधार की संभावना को खुला रखता है, जो किसी भी दृष्टिकोण से जीत की स्थिति है।” मिसरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका की “सफल और महत्वपूर्ण” यात्रा के बाद सोमवार को स्वदेश के लिए रवाना हो गए। इस यात्रा के दौरान मोदी ने डेलावेयर में ‘क्वाड’ (चतुर्भुज सुरक्षा वार्ता) के सदस्य देशों के शासनाध्यक्षों के शिखर सम्मेलन में भाग लिया, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, ‘लांग आईलैंड’ में प्रवासी भारतीयों के एक बड़े कार्यक्रम को संबोधित किया, प्रौद्योगिकी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) की गोलमेज बैठक को संबोधित किया, संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘भविष्य के शिखर सम्मेलन’ में अपने विचार रखे तथा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास सहित विश्व के कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। (भाषा)

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