Wednesday, February 11, 2026
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रेलवे स्टेशनों के नाम ऐसे नहीं बदले जाते, जानें कैसे और कौन करता है बदलाव

उत्तर प्रदेश में लखनऊ मंडल के 8 रेलवे स्टेशनों के नाम बदल दिए गए हैं। स्टेशनों के नाम संतों, स्वतंत्रता सेनानियों और स्थानीय आश्रमों के नाम पर रखे गए हैं। यह पहली बार नहीं है जब स्टेशनों के नाम बदले गए हैं, पहले भी इनके नाम बदले गए हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि रेलवे स्टेशन का नाम बदलने का अधिकार किसके पास है और यह कैसे बदला जाता है? आइए जानते हैं।

यूपी के इन स्टेशनों के नाम बदले गए

सबसे पहले जानते हैं कि किन 8 स्टेशनों के नाम बदले गए हैं। उत्तर रेलवे की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि कासिमपुर हॉल्ट अब जायस सिटी के नाम से जाना जाएगा। इसके अलावा जायस को गुरु गोरखनाथ धाम, मिसरौली को मां कालिकन धाम, बनी को स्वामी परमहंस, निहालगढ़ को महाराजा बिजली पासी, अकबरगंज को मां अहोरवा भवानी धाम, वारिसगंज को अमर शहीद भाले सुल्तान और फुरसतगंज को तपेश्वरनाथ धाम के नाम से जाना जाएगा।

क्यों बदले जाते हैं स्टेशनों के नाम?

रेलवे स्टेशनों के नाम बदलने की मांग समय-समय पर आती रहती है। इन्हें बदलने के पीछे अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं। जिन 8 स्टेशनों के नाम बदले गए हैं, उनके सांस्कृतिक पहचान और विरासत को बचाए रखने की मांग के बाद नाम बदले गए हैं। उदाहरण के लिए, प्रमुख गुरु गोरखनाथ धाम आश्रम जायस रेलवे स्टेशन के पास है, इसलिए स्टेशन का नाम बदलकर आश्रम के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा गया। जबकि अकबरगंज और फुरसतगंज रेलवे स्टेशनों के पास भगवान शिव और देवी काली के कई मंदिर हैं, इसलिए इनका नाम बदलकर मां कालीकरण धाम, स्वामी परमहंस, मां अहोरवा भवानी धाम और तपेश्वरनाथ धाम रेलवे स्टेशन रखा गया है।

स्टेशनों के नाम बदलने की क्या प्रक्रिया है

क्या रेलवे बोर्ड के पास रेलवे स्टेशन का नाम बदलने का अधिकार है? नहीं, रेलवे स्टेशनों के नाम नहीं बदलता। स्टेशनों के नाम बदलने का फैसला राज्य सरकार के हाथ में होता है, वह अपने विवेक से तय करती है कि किस स्टेशन का नाम बदला जाना है। इसके बाद राज्य सरकार इस मामले के लिए नोडल मंत्रालय गृह मंत्रालय को अनुरोध भेजती है। जिसके बाद हरी झंडी मिलने पर नाम बदलने को मंजूरी मिल जाती है। लेकिन यह भी ध्यान में रखा जाता है कि प्रस्तावित नाम वाला कोई रेलवे स्टेशन पहले से मौजूद न हो।

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