Monday, February 9, 2026
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स्ट्रे डॉग्स की सुनवाई पर SC की टिप्पणी, कहा – डरने वालो को सूंघकर काटते हैं आवारा कुत्ते

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को आवारा कुत्तों से जुड़ी याचिकाओं पर हुई सुनवाई की। यह बहस सिर्फ कुत्तों के नियंत्रण तक सीमित नहीं रही, बल्कि शहरी जीवन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय संतुलन से भी जुड़ गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ?

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की विशेष पीठ जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया इस मामले की सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने साफ किया कि उसने कभी यह आदेश नहीं दिया कि सड़कों से सभी कुत्तों को हटा दिया जाए। अदालत का फोकस सिर्फ इतना है कि एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।

कुत्तों के व्यवहार पर कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि कुत्ते उन लोगों को पहचान सकते हैं जो उनसे डरते हैं या जिन्हें पहले काटा गया हो। ऐसे मामलों में उनके आक्रामक होने की संभावना बढ़ जाती है। अदालत की यह बात सार्वजनिक सुरक्षा और व्यवहार विज्ञान दोनों नजरियों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

जस्टिस संदीप मेहता ने कही ये बात

जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि कोर्ट ने कभी यह निर्देश नहीं दिया कि सभी कुत्तों को सड़कों से हटाया जाए। बल्कि हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उनके साथ नियमों के अनुसार व्यवहार होना चाहिए।

बढ़ सकती है चूहों की आबादी – सीनियर एडवोकेट सी. यू. सिंह

सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट सी. यू. सिंह ने तर्क दिया कि दिल्ली जैसे शहरों में पहले से ही चूहों की समस्या बढ़ रही है। अगर कुत्तों को हटा दिया गया, तो चूहों की आबादी तेजी से बढ़ सकती है, जिससे बीमारियों और स्वच्छता संकट का खतरा बढ़ जाएगा। इस पर जस्टिस मेहता ने कहा कि कुत्ते और बिल्लियां स्वाभाविक रूप से दुश्मन हैं और बिल्लियां चूहों को मारती हैं, तो अगर संतुलन की बात करें, तो शायद हमें ज्यादा बिल्लियां बढ़ानी चाहिए।

क्यों जरूरी हैं ABC नियम ?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुत्तों को हटाने से समस्या खत्म नहीं होगी। असली समाधान है नसबंदी, टीकाकरण और उन्हें उसी इलाके में दोबारा छोड़ने की नीति। वकीलों ने बताया कि जहां ABC नियमों का पालन सही तरीके से हुआ है, वहां आवारा कुत्तों की संख्या और काटने की घटनाओं में कमी आई है।

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