दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति यून सुक योल ने देश में लगाए गए मार्शल लॉ का आदेश वापस ले लिया है। 3 दिसंबर की रात, अचानक किए गए इस फैसले से देशभर में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अराजकता फैलने लगी। राष्ट्रपति के फैसले के खिलाफ नेशनल असेंबली में 190 सांसदों ने सर्वसम्मति से इसे पलटने की मांग की। जिसके बाद जनता और राजनीतिक दबाव के चलते, राष्ट्रपति ने सिर्फ 6 घंटे बाद मार्शल लॉ हटाने की घोषणा कर दी।
बता दें कि मार्शल लॉ का उद्देश्य आमतौर पर आपातकालीन स्थितियों में शांति बहाल करना होता है, लेकिन इस फैसले ने देश में राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता को और बढ़ा दिया।
राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग तेज
मार्शल लॉ हटाने के बाद भी जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं और प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति यून सुक योल के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस फैसले ने न केवल नागरिक अधिकारों का हनन किया, बल्कि लोकतंत्र की भावना पर भी आघात किया। सियोल समेत देश के प्रमुख शहरों में हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं।
दक्षिण कोरिया की मुख्य विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी (DPK) ने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग लाने का ऐलान किया है। DPK नेताओं का कहना है कि राष्ट्रपति का यह कदम संविधान का उल्लंघन है और उन्हें सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
देश में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता
मार्शल लॉ के आदेश और उसके बाद के विरोध प्रदर्शनों ने देश में राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा दिया है। जनता का आक्रोश और विपक्ष की आक्रामक रणनीति राष्ट्रपति यून सुक योल के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
राष्ट्रपति योल ने क्यों लगाया मार्शल लॉ
दरअसल, दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति यून सुक योल की सरकार राजनीतिक दबाव का सामना कर रही है। 300 सीटों वाली संसद में विपक्षी DPK को 170 सीटें मिली हैं, जबकि सत्ताधारी पीपल पावर पार्टी के पास केवल 108 सीटें हैं। DPK के बहुमत के कारण राष्ट्रपति का कामकाज प्रभावित हो रहा है। 2022 में मामूली अंतर से जीतने वाले राष्ट्रपति की लोकप्रियता 25% तक गिर गई है। अपनी गिरती साख और विपक्ष पर राष्ट्र विरोधी आरोपों के चलते उन्होंने मार्शल लॉ लागू किया।



