पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने घोषणा की है कि राज्य सरकार सीमा से सटे क्षेत्रों में काम कर रहे डॉक्टरों और शिक्षकों को विशेष भत्ते प्रदान करेगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल सीमावर्ती इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं में मजबूती आएगी, बल्कि सरकारी स्कूलों में लंबे समय से बनी शिक्षकों की कमी भी दूर हो सकेगी।
पत्रकारों से बातचीत में चीमा ने बताया कि सीमा क्षेत्रों के लिए नियुक्ति तो नियमित रूप से की जाती है, लेकिन बाद में डॉक्टर और शिक्षक अपने ट्रांसफर अन्य आरामदायक क्षेत्रों में करवाने में सफल हो जाते हैं। इसके कारण इन इलाकों में मूलभूत सेवाओं पर लगातार असर पड़ता रहा है।
‘आप’ सरकार का फोकस-स्वास्थ्य और शिक्षा
वित्त मंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार शुरुआत से ही स्वास्थ्य और शिक्षा को अपनी प्राथमिकता में रखती आई है। सरकार समय-समय पर इन क्षेत्रों में सुधार के लिए नीतिगत बदलाव लागू करती रही है और नए फैसले भी इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम हैं।
सीमा क्षेत्रों के लिए बनेगा विशेष पैनल
चीमा ने आगे बताया कि सरकार ने निर्देश जारी किए हैं कि डॉक्टरों और शिक्षकों का एक अलग पैनल तैयार किया जाए। इस पैनल में शामिल कर्मियों को सीमावर्ती क्षेत्रों में सेवा देने पर अतिरिक्त इंसेंटिव और विशेष भत्ते प्रदान किए जाएंगे, जिससे उन्हें इन क्षेत्रों में काम करने के लिए प्रोत्साहन मिल सके।
डॉक्टरों को दिया जाएगा इंसेंटिव
बताया जा रहा है कि इस कदम से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी। राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सरकारी पैनल में शामिल डॉक्टरों को दिन की ड्यूटी के लिए ₹ 1000 और रात की ड्यूटी के लिए ₹ 2000 का भुगतान किया जाएगा। कैबिनेट के इस फैसले से स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को मजबूत करने की उम्मीद है।
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12 श्रेणियों में 300 एक्सपर्ट डॉक्टरों को किया शामिल
मुख्यमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि कैबिनेट ने 12 जरूरी श्रेणियों में 300 एक्सपर्ट डॉक्टरों को शामिल करने का भी फैसला किया है, जिनमें दवा, बाल रोग, मनोविज्ञान, त्वचा रोग, छाती और टीबी, सर्जरी, स्त्री रोग, आर्थोपेडिक्स, आंखों का रोग, ईएनटी और एनेस्थिसियोलॉजी शामिल हैं।



