Sunday, February 8, 2026
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‘ग्रीनलैंड पर हमले की तैयारी करो’, ट्रंप ने सेना को दिया आदेश!

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक सनसनीखेज दावा सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने की संभावनाओं को लेकर अमेरिकी सेना को सैन्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। ट्रंप इससे पहले भी ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात करते रहे हैं, लेकिन अब कहा जा रहा है कि उन्होंने स्पेशल फोर्स कमांडरों से संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर काम करने को कहा है।

हालांकि, अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी इस विचार से सहमत नहीं दिखते। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, सैन्य नेतृत्व ने इस कदम का खुला विरोध किया है। सूत्रों का कहना है कि ट्रंप के कुछ करीबी राजनीतिक सलाहकार – जिनमें स्टीफन मिलर का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है, इस योजना को आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं।

वेनेजुएला के बाद ग्रीनलैंड?

इन सलाहकारों का तर्क है कि वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने से जुड़े अभियान की कथित सफलता के बाद अमेरिका को ग्रीनलैंड को लेकर भी तेज़ी दिखानी चाहिए, ताकि रूस या चीन वहां अपनी पकड़ मजबूत न कर सकें। ब्रिटिश राजनयिकों का मानना है कि ट्रंप की इस सोच के पीछे घरेलू राजनीति भी अहम कारण है। अमेरिका में इस साल मध्यावधि चुनाव होने हैं और अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार दबाव में है। ऐसे में एक बड़ा राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दा मतदाताओं का ध्यान भटका सकता है।

क्या नाटो के लिए खतरा?

अगर अमेरिका ग्रीनलैंड को लेकर कोई आक्रामक कदम उठाता है, तो इसका असर केवल आर्कटिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। इससे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के साथ टकराव की स्थिति बन सकती है और नाटो जैसे सैन्य गठबंधन के भविष्य पर भी गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। कुछ राजनयिक दस्तावेजों में इसे नाटो के भीतर से टूटने का संभावित खतरा बताया गया है। जानकारी के अनुसार, ट्रंप ने जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) से ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई की योजना तैयार करने को कहा है। लेकिन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने इसका विरोध किया है। उनका कहना है कि ऐसा कदम अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा और अमेरिकी कांग्रेस भी इसे मंजूरी नहीं देगी।

सेना की आपत्ति और वैकल्पिक सुझाव

एक सूत्र के मुताबिक, सैन्य अधिकारी ट्रंप का ध्यान अन्य विकल्पों की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जैसे रूस के कथित “घोस्ट शिप्स” पर कार्रवाई, जो पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल होते हैं, या ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कदम। राजनयिक हलकों में कई परिदृश्यों पर चर्चा हुई है। सबसे खराब स्थिति यह मानी जा रही है कि अमेरिका ताकत या राजनीतिक दबाव के जरिए ग्रीनलैंड को डेनमार्क से अलग करने की कोशिश करे, जिससे नाटो भीतर से ही कमजोर हो सकता है।

डेनमार्क को ट्रंप की चेतावनी

इसी बीच, ट्रंप ने शुक्रवार को फिर चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में नहीं लिया, तो भविष्य में रूस या चीन वहां कब्जा जमा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सौदेबाज़ी से बात नहीं बनी, तो अमेरिका को “कठोर रास्ता” अपनाना पड़ सकता है। वहीं, ग्रीनलैंड के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने एक संयुक्त बयान जारी कर साफ किया है कि वे न तो अमेरिकी बनना चाहते हैं और न ही डेनमार्क के अधीन रहना चाहते हैं। उनका कहना है कि ग्रीनलैंड का भविष्य तय करने का अधिकार केवल वहां के लोगों का है।

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