Sunday, February 8, 2026
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PM मोदी की पगड़ी ने एक बार फिर खींचा लोगों का ध्यान, बंधेज के जरिए दिया विविधता का संदेश…

हर वर्ष की भांति इस बार भी गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहनावा केवल फैशन की चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने भारत की सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध परंपराओं का सशक्त संदेश भी दिया। इस वर्ष प्रधानमंत्री का लुक परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मेल दिखाई दिया।

उन्होंने गहरे नीले रंग का कुर्ता, सफेद चूड़ीदार पायजामा और उसके ऊपर आसमानी रंग की आधी बाजू वाली बंदगला जैकेट पहनी थी। यह सौम्य और संतुलित रंग संयोजन उनके व्यक्तित्व में एक अलग ही गरिमा और आत्मविश्वास को दर्शा रहा था। उनका संपूर्ण परिधान भारतीय परंपरागत वेशभूषा की सादगी के साथ आधुनिक फैशन की झलक पेश कर रहा था।

मल्टी-कलर साफा बना आकर्षण का केंद्र

हालांकि पूरे परिधान में सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करने वाला तत्व उनका बहुरंगी साफा रहा। इस बार प्रधानमंत्री ने लाल, गुलाबी और हरे रंगों से सजी हुई एक भव्य पगड़ी धारण की थी, जिस पर सुनहरी बूटी की महीन कारीगरी की गई थी। बंधेज कला से प्रेरित यह साफा भारतीय हस्तशिल्प की उत्कृष्टता और कलात्मकता को बखूबी दर्शा रहा था।

भारतीय संस्कृति में पगड़ी को केवल एक वस्त्र नहीं माना जाता, बल्कि यह सम्मान, स्वाभिमान, नेतृत्व और पहचान का प्रतीक होती है। प्रधानमंत्री द्वारा पहना गया यह साफा राजस्थान की पारंपरिक ‘साफा’ शैली और गुजरात की प्रसिद्ध ‘बांधनी’ कला की झलक लिए हुए था, जो भारत की रंगीन और जीवंत सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच पर प्रस्तुत करता है।

बहुरंगी साफे ने दिया ये संदेश

प्रधानमंत्री मोदी लंबे समय से अपने पहनावे के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों और समुदायों को सम्मान देते आए हैं। कभी राजस्थानी साफा, कभी मराठी फेटा, तो कभी केसरिया पगड़ी या फिर जनजातीय हस्तनिर्मित टोपी-हर परिधान किसी न किसी क्षेत्र की पहचान को राष्ट्रीय गौरव से जोड़ देता है।

इस गणतंत्र दिवस पर उनका बहुरंगी साफा यह संदेश दे रहा था कि भारत विविध संस्कृतियों और परंपराओं से सजा हुआ एक ऐसा गुलदस्ता है, जिसकी खुशबू पूरी दुनिया में फैल रही है। जब प्रधानमंत्री किसी क्षेत्र विशेष की पारंपरिक पगड़ी पहनते हैं, तो वह उस समुदाय की अस्मिता और गौरव को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित कर देते हैं।

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