70वें नेशनल अवॉर्ड्स के विजेताओं की घोषणा हो चुकी है और इस बार अभिनेता पवन मल्होत्रा को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला है। उन्होंने हरियाणवी फिल्म ‘फौजा‘ में अपने शानदार अभिनय के लिए यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड जीता है। यह उनके करियर की एक बड़ी उपलब्धि है, खासकर इसलिए क्योंकि इससे पहले भी वह नेशनल अवॉर्ड्स से संबंधित चर्चा में रहे हैं, लेकिन व्यक्तिगत रूप से उन्हें यह सम्मान नहीं मिला था।
पवन मल्होत्रा के करियर में कई बार ऐसा हुआ है जब उनकी फिल्मों को नेशनल अवॉर्ड्स मिले, लेकिन उन्हें व्यक्तिगत तौर पर यह अवॉर्ड नहीं मिला। उनकी फिल्मों ‘बाघ बहादुर‘ और ‘सलीम लंगड़े पे मत रो‘ को नेशनल अवॉर्ड मिले थे, लेकिन इन फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाने के बावजूद पवन को उस समय कोई अवॉर्ड नहीं मिला था। इस बात को लेकर उन्होंने अपनी निराशा भी व्यक्त की थी।
हालांकि, बाद में उन्हें शॉर्ट फिल्म ‘फकीर‘ (1998) में उनके काम के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला था, जो नॉन-फीचर कैटेगरी में था। इसके अलावा, उन्हें फिल्म ‘चिल्ड्रन ऑफ वॉर‘ के लिए फ्रांस में बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड भी मिला। लेकिन उन्हें मुंबई में कोई बड़ा अवॉर्ड नहीं मिला। पवन मल्होत्रा ने कहा कि उन्हें बॉम्बे के अवॉर्ड्स की विशेष परवाह नहीं है, बल्कि वह अपनी फिल्मों की गुणवत्ता और अपने काम को लेकर अधिक चिंतित रहते हैं।
वहीं, अब पवन मल्होत्रा का सपना आखिरकार पूरा हो गया है। उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है, जो उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है। फिल्म ‘फौजा‘ ने भी बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर और बेस्ट लिरिक्स कैटेगरी में नेशनल अवॉर्ड जीते हैं, जिससे यह फिल्म और पवन मल्होत्रा दोनों ही चर्चा में हैं।



