Wednesday, February 11, 2026
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एक महीने की तैयारी, दीवार पर टंगा सीक्रेट नोट… फिर अतुल सुभाष ने खत्म कर ली अपनी जिंदगी

AI सॉफ्टवेयर इंजीनियर अतुल सुभाष के सुसाइड केस को जानकर देश का हर नागरिक स्तब्ध है। मामले में कई चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। अतुल के भाई की शिकायत पर बेंगलुरु पुलिस ने पत्नी निकिता सिंघानिया समेत 4 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इस बीच अतुल के बारे में ऐसी जानकारी सामने आई है जिससे पता चला है कि वह एक महीने पहले से ही सुसाइड करने की तैयारी कर रहा था। उसकी एक चेकलिस्ट मिली है, जिसमें चौंकाने वाली बातें नजर आईं।

अतुल सुभाष ने सुसाइड जैसा खौफनाक कदम उठाने से पहले एक चेकलिस्ट बनाई थी। यह चेकलिस्ट उसके हर काम की थी, जिसे तीन हिस्सों में बांटा गया है। पुलिस ने उसकी यह चेकलिस्ट बेंगलुरु स्थित उसके घर से बरामद की है। अतुल ने यह चेकलिस्ट दीवार पर लगाई थी। चेकलिस्ट के बगल में एक और कागज चिपका हुआ था जिस पर लिखा था- न्याय मिलना चाहिए।

जानकारी के मुताबिक 34 साल के अतुल ने एक महीने पहले ही सुसाइड की प्लानिंग कर ली थी। उसने मौत से पहले जरूरी कामों को पूरा करने के लिए चेकलिस्ट को तीन हिस्सों में बांट लिया था। उन्होंने ‘जीवन के अंतिम दिन से पहले’, ‘मृत्यु के दिन’ और ‘आत्महत्या से पहले के अंतिम क्षण’ के कार्य तय कर लिए थे और उन्होंने वैसा ही किया। यह सूची महीनों पहले इतनी सावधानी से बनाई गई थी कि इससे संबंधित कोई भी कार्य लंबित न रहे।

अतुल सुभाष की चेकलिस्ट

अतुल सुभाष ने इस चेकलिस्ट को तीन भागों में विभाजित किया था। ये भाग थे- ‘अंतिम दिन से पहले’, ‘अंतिम दिन’ और ‘अंतिम क्षण को अंजाम देना’। इसका मतलब था अपने फोन से फिंगरप्रिंट और फेस रिकग्निशन हटाना, ताकि उसके परिचित उसकी मौत के बाद उसे एक्सेस कर सकें। अपनी कार, बाइक और कमरे की चाबियाँ फ्रिज पर छोड़ना, ऑफिस का काम पूरा करना और अपना लैपटॉप और चार्जर जमा करना आदि।

एक अलग कॉलम

चेकलिस्ट में एक कॉलम था जिसमें किए जाने वाले कार्यों को चेक किया जा सकता था। कुछ कार्य पूरे हो चुके थे। जिन्हें अलग से दिखाया गया था। इनमें अपने पैसे को सुरक्षित रखना, ऑफिस का काम पूरा करना, कानूनी तैयारी करना, सभी संचार एकत्र करना और डेटा का बैकअप लेना आदि शामिल थे।

आत्महत्या में देरी क्यों हुई?

सुभाष ने इन सभी चेकलिस्ट को बनाने में बहुत सावधानी बरती थी। अतुल सुभाष के सुसाइड नोट से पता चलता है कि उन्हें यह तय करने में समय लगा कि उनकी सभी लंबित जिम्मेदारियाँ अब पूरी हो चुकी हैं। अतुल सुभाष ने लिखा है कि इस काम को पूरा करने में उन्हें कुछ महीने लग गए, सरकारी दफ्तरों में काम बहुत धीरे-धीरे होता है और इसी वजह से उन्हें आत्महत्या करने में देरी हुई।

‘परिवार को कोई परेशान नहीं करेगा’

अतुल सुभाष ने अपने सुसाइड नोट में यह भी लिखा है कि वह जितनी मेहनत करेंगे, उतना ही उन्हें और उनके परिवार को परेशान किया जाएगा, उनसे जबरन वसूली की जाएगी और यह पूरी न्याय व्यवस्था उन्हें परेशान करने वालों की मदद करेगी। अगर वह इस दुनिया से चले गए तो उनके पास पैसे नहीं होंगे और उनके बूढ़े माता-पिता और उनके भाई को परेशान नहीं किया जाएगा।

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