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'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने पर संसद में PM मोदी ने कही ये 5 बड़ी बातें
Monday, February 9, 2026
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‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर संसद में PM मोदी ने कही ये 5 बड़ी बातें

आजादी के प्रतीक और राष्ट्रभावना के प्रतीक गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सोमवार को संसद में विशेष चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में इस चर्चा की शुरुआत करते हुए वंदे मातरम के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से बात की।

वंदे मातरम् के 50 वर्ष होने पर देश गुलामी में था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहा कि जब वंदे मातरम् के 50 वर्ष हुए थे, तब देश गुलामी में था। 100 वर्ष पूरे होने पर देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा हुआ था और आज 150 वर्ष पूरे होने पर यह अवसर उस गौरवशाली परंपरा को दोबारा स्थापित करने का है।

वंदे मातरम् की वजह से मिली आजादी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं था, बल्कि यह वह भावना थी जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा दी। यही वह मंत्र था जिसने भारत को आजादी की राह पर अग्रसर किया।” उन्होंने कहा कि यह सिर्फ अंग्रेजों को भगाने का नारा नहीं था, बल्कि “मां भारती को बेड़ियों से मुक्त कराने की जंग” का प्रतीक था। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखे इस गीत ने पूर्व से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण, हर भारतीय को एक सूत्र में बांध दिया।

बंगाल विभाजन के समय वंदे मातरम् बना शक्ति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 1905 में जब अंग्रेजों ने बंगाल विभाजन किया, तब वंदे मातरम् लोगों के लिए संघर्ष का प्रतीक बन गया। “अंग्रेज भारत को तोड़ना चाहते थे, लेकिन वंदे मातरम् गली-गली में गूंजता रहा और यह नारा बंगाल की एकता और भारत की शक्ति का प्रतीक बन गया।”

महिलाओं और बच्चों ने भी उठाई आजादी की मशाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में आजादी के आंदोलन में महिलाओं की भूमिका को भी याद किया। उन्होंने कहा कि “बारिसाल (अब बांग्लादेश) में वंदे मातरम् गाने पर सबसे अधिक जुर्माने लगाए गए, लेकिन वहां की वीरांगनाओं ने झुकने से इनकार कर दिया।” उन्होंने श्रीमती सरोजिनी बोस का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने वचन लिया था कि जब तक वंदे मातरम् पर लगा प्रतिबंध नहीं हटेगा, तब तक वे चूड़ियां नहीं पहनेंगी।

मैडम भीकाजी कामा ने पेरिस से निकाला अखबार ‘वंदे मातरम’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब अंग्रेजों ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता पर रोक लगाई, तब मैडम भीकाजी कामा ने पेरिस से एक अखबार निकाला, जिसका नाम उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ रखा। 1907 में वी.ओ. चिदंबरम पिल्लै ने जब स्वदेशी कंपनी का जहाज बनाया, तब उस पर भी यही नारा अं कित था। उन्होंने बताया कि राष्ट्रकवि सुब्रमण्यम भारती ने वंदे मातरम् का तमिल अनुवाद किया और अपने गीतों में इसे गहरी श्रद्धा के साथ अपनाया।

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