Sunday, February 8, 2026
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‘सुबह-शाम होगी पूजा, जुमे पर होगी नमाज…’ धार भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर को लेकर बसंत पंचमी के दिन दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग समय पर धार्मिक गतिविधियों की इजाजत दी है। अदालत ने हिंदू पक्ष को सूर्योदय से सूर्यास्त तक प्रार्थना करने की इजाजत दी है, जबकि मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज पढ़ने करने की अनुमति दी है।

सम्मान बनाए रखने की अपील – SC

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से संयम और सहयोग की अपील की। अदालत ने कहा है कि किसी भी तरह की असहज स्थिति से बचने के लिए शांति और आपसी सम्मान बनाए रखना जरूरी है। साथ ही, राज्य सरकार और जिला प्रशासन को कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

न हो सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि नमाज के लिए आने वाले लोगों की अनुमानित संख्या जिला प्रशासन को पहले ही बता दी जाए। अदालत ने सुझाव दिया कि प्रशासन जरूरत पड़ने पर पास सिस्टम या कोई अन्य व्यवस्था लागू कर सकता है, ताकि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा में कोई चूक न हो।

सुप्रीम कोर्ट तक क्यों पहुंचा मामला?

दरअसल, हिंदू पक्ष की ओर से 20 जनवरी को शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि बसंत पंचमी के अवसर पर पूरे दिन भोजशाला में अखंड सरस्वती पूजा की अनुमति दी जाए। इस वर्ष बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ रही है, जिस दिन परंपरागत रूप से मुस्लिम समुदाय भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज पढ़ सकते हैं। इसी टकराव के चलते मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

क्या है भोजशाला विवाद की जड़?

धार स्थित भोजशाला एक ASI संरक्षित स्मारक है। हिंदू समुदाय इसे देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना ठीक इसके उलट है।

18वीं सदी में अंग्रेजी शासन के दौरान यहां खुदाई कराई गई थी, जिसमें देवी सरस्वती की प्रतिमा मिलने का दावा किया गया। यह प्रतिमा बाद में लंदन ले जाई गई, जो अब भी वहां के संग्रहालय में बताई जाती है।

पहले से लागू है साप्ताहिक व्यवस्था

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के आदेश के अनुसार, भोजशाला परिसर में हिंदू समुदाय को हर मंगलवार पूजा की और मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार नमाज की अनुमति पहले से दी जाती रही है। बसंत पंचमी के शुक्रवार को पड़ने के कारण यह मामला विशेष बन गया।

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