Wednesday, February 11, 2026
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16 साल की उम्र में अनाथ हुआ ये खिलाड़ी, अब बना टीम इंडिया का नया कप्तान !

भारत की 140 करोड़ से ज्यादा की जनता से अगर पूछा जाए कि उनका सबसे पसंदीदा खेल कौन सा है तो वह क्रिकेट का ही नाम लेंगे. इसलिए भारत में क्रिकेट सबसे ज्यादा देखा जाने वाला खेल है. ऐसे में टीम इंडिया की ब्लू जर्सी पहनने के लिए खिलाड़ियों को ढेर सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. हमने अभी तक कई स्टार क्रिकेटर्स की संघर्ष की कहानियां सुनी हैं. लेकिन हाल ही में भारत की अंडर-19 टीम के कप्तान बनाए गए मोहम्मद अमान की कहानी ने सभी को हिलाकर रख दिया है. उनके लिए ये सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा है. लेकिन अब वह भारत की अंडर-19 टीम की जिम्मेदारी संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

अंडर-19 टीम के कप्तान कौन हैं मोहम्मद अमान?

मोहम्मद अमान उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के रहने वाले हैं. इससे पहले नवंबर 2023 में हुए एशिया कप में अमान अंडर-19 टीम का हिस्सा रह चुके हैं. मोहम्मद अमान बेहतरीन बल्लेबाज हैं. 18 साल के अमान एक फास्ट बॉलर भी हैं. बता दें, उनकी मां सायबा 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान इस दुनिया को अलविदा कह गई थीं. वहीं, उनके पिता मेहताब एक ट्रक ड्राइवर थे, जिनका निधन साल 2022 में हो गया था. यानी अमान 16 साल की उम्र मं अनाथ हो गए थे. इसके बाद उन्होंने अपने तीन छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी को संभाला और अपने खेल का भी जारी रखा. इस मेहनत का इनाम अब उन्हें मिल गया है.

मोहम्मद अमान ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, ‘जिस दिन मैंने अपने पिता को खोया, ऐसा लगा मानो मैं अचानक एक दिन में ही बड़ा हो गया. मुझे अपनी छोटी बहन और दो भाई की जिम्मेदारी संभालनी थी, पिता के जाने के बाद मैं परिवार का मुखिया था. इस घटना के बाद मैंने अपने आप से कहा क्रिकेट छोड़ देना चाहिए. सहारनपुर में परिवार चलाने के लिए नौकरी भी तलाश की लेकिन कोई काम नहीं मिला. ऐसे में कुछ लोग मदद के लिए आगे आए जिससे कि मैं अपना खेल जारी रख सकूं.’

भूखे पेट ट्रेन के शौचालय के पास बैठ किया सफर

मोहम्मद अमान ने ये भी बताया कि एक समय ऐसा भी था कि उन्हें भूखे पेट सोना पड़ता था. भूखे पेट सोने के बारे में बता करते हुए अमान ने कहा, ‘भूख से बड़ा कुछ नहीं है. मैं अब अपना खाना कभी बर्बाद नहीं करता क्योंकि मुझे पता है कि इसे कमाना कितना मुश्किल है. जब कानपुर में यूपीसीए के आयु वर्ग के ट्रायल होते थे, तो मैं ट्रेन के जनरल डिब्बे में सफर करता था, शौचालय के पास बैठता था. अब, जब मैं फ्लाइट से सफर करता हूं और किसी अच्छे होटल में ठहरता हूं, तो मैं बस भगवान का शुक्रिया अदा करता हूं.’

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