Saturday, February 7, 2026
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मेरठ : बच्चे के सिर में लगी चोट, डॉक्टर ने लगाई ‘Fevikwik’

उत्तर प्रदेश के मेरठ से मेडिकल लापरवाही का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक निजी अस्पताल के डॉक्टर ने ढाई साल के बच्चे की चोट पर टांके लगाने की बजाय ‘Fevikwik’ चिपका दिया। इस घटना के बाद बच्चे के परिजनों ने डॉक्टर के खिलाफ मेरठ के CMO (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) से शिकायत की है। फिलहाल, पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

चोट पर लगाई Fevikwik

मामला मेरठ के जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित मेपल्स हाइट का है। जानकारी के अनुसार, फाइनेंसर सरदार जसपिंदर सिंह का ढ़ाई साल का बेटा मनराज सिंह घर पर खेलते समय टेबल के कोने से टकरा गया, जिससे उसकी आंख के पास गहरी चोट लग गई और खून बहने लगा। परिजन उसे तुरंत एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने टांके लगाने के बजाय परिजनों से ₹5 वाली Fevikwik लाने को कहा। इसके बाद डॉक्टर ने Fevikwik से ही बच्चे का घाव जोड़ दिया।

डॉक्टर ने कहा – बच्चा घबराया हुआ है

परिजनों ने बताया कि Fevikwik लगाने के बाद बच्चा तेज दर्द से रोता रहा, लेकिन डॉक्टर ने कहा कि “बच्चा घबराया हुआ है, कुछ देर में ठीक हो जाएगा।” हालांकि, दर्द बढ़ने पर परिजन घबराए और बच्चे को दूसरे अस्पताल ले गए। दूसरे अस्पताल के डॉक्टरों को बच्चे के जख्म से Fevikwik हटाने में करीब तीन घंटे लगे। इसके बाद ही चोट पर टांके लगाए जा सके। डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि यदि Fevikwik आंख में गिर जाती, तो यह बच्चे की आंखों के लिए खतरा बन सकती थी।

लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने निजी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि Fevikwik जैसी रासायनिक वस्तु का प्रयोग मानव त्वचा पर बेहद खतरनाक हो सकता है। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाने की मांग की है।

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