Tuesday, February 10, 2026
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57 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान के बाद भी गंगाजल शुद्ध, वैज्ञानिक शोध में बड़ा खुलासा

MahaKumbh 2025: प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ 2025 में अब तक 57 करोड़ से अधिक श्रद्धालु गंगा में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के स्नान के बावजूद गंगा जल की शुद्धता बरकरार है। वैज्ञानिक दृष्टि से इसे सिद्ध करने का दावा किया है पद्मश्री वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार सोनकर ने, जिन्होंने अपने प्रयोगशाला परीक्षणों में यह साबित किया कि गंगा का जल सिर्फ स्नान योग्य ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है।

गंगा जल की शुद्धता पर वैज्ञानिक प्रमाण

डॉ. अजय कुमार सोनकर, जो विश्व स्तर पर मोती उत्पादन और जल शुद्धता पर अपने शोध के लिए प्रसिद्ध हैं, उन्होंने गंगा जल के नमूने स्वयं एकत्र कर प्रयोगशाला में परीक्षण किए। उन्होंने प्रयागराज के संगम, अरैल समेत पांच प्रमुख घाटों से जल के नमूने लिए और तीन महीने के शोध में यह सिद्ध किया कि गंगा जल सबसे शुद्ध है।

गंगा जल में नहीं बढ़े बैक्टीरिया, पीएच स्तर स्थिर

  • वैज्ञानिक परीक्षण में गंगा जल में बैक्टीरिया की वृद्धि नहीं देखी गई।
  • जल के पीएच स्तर में कोई गिरावट नहीं आई, बल्कि यह 8.4 से 8.6 के बीच पाया गया, जो इसे अल्कलाइन वाटर की तरह शुद्ध बनाता है।
  • जल को 14 घंटे तक इंक्यूबेशन तापमान पर रखने के बावजूद इसमें किसी प्रकार की हानिकारक बैक्टीरिया की वृद्धि नहीं हुई।

बैक्टीरियोफेज: गंगा जल की स्वच्छता का रहस्य

डॉ. सोनकर के शोध में पाया गया कि गंगा जल में 1100 से अधिक प्रकार के बैक्टीरियोफेज पाए जाते हैं। बैक्टीरियोफेज वे सूक्ष्मजीव होते हैं जो हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट कर देते हैं। यही कारण है कि गंगा जल में करोड़ों श्रद्धालुओं के स्नान करने के बावजूद उसमें कोई दूषित प्रभाव नहीं पड़ा।

दुष्प्रचार को किया खारिज

कुछ संस्थाओं और लोगों द्वारा यह दावा किया गया था कि गंगा जल स्नान और आचमन के लिए उपयुक्त नहीं है, लेकिन वैज्ञानिक परीक्षणों ने इस दावे को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया।

  • जल में किसी भी प्रकार की दुर्गंध नहीं पाई गई।
  • पीएच स्तर सामान्य से बेहतर था।
  • किसी प्रकार की बैक्टीरियल ग्रोथ नहीं हुई।

स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है गंगा जल

डॉ. सोनकर के अनुसार, गंगा जल त्वचा संबंधी रोगों को रोकने में सहायक है। प्रयोगशाला परीक्षणों में यह भी सिद्ध हुआ कि गंगा जल में स्नान करने से कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता।

अगर गंगा जल दूषित होता तो क्या होता?

वैज्ञानिक ने तर्क दिया कि अगर गंगा जल वास्तव में दूषित होता, तो 57 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान के बाद महामारी जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती।

  • अस्पतालों में मरीजों की भीड़ लग जाती।
  • गंगा स्नान करने वाले श्रद्धालु बीमार पड़ जाते।
    लेकिन ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला, जो यह साबित करता है कि गंगा जल की प्राकृतिक शुद्धता आज भी बरकरार है।

गंगा जल की वैज्ञानिक जांच की खुली चुनौती

डॉ. सोनकर ने कहा कि अगर किसी को गंगा जल की शुद्धता पर संदेह है तो वह स्वयं जल का नमूना लेकर उनकी प्रयोगशाला में जांच कर सकता है। उनका यह शोध न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से बल्कि आस्था और विश्वास की दृष्टि से भी गंगा जल की पवित्रता को प्रमाणित करता है।

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