Monday, February 9, 2026
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SCO बैठक में जयशंकर ने पाकिस्तान की लगा दी क्लास! आतंकवाद पर शहबाज शरीफ के सामने ही धो डाला

भारत के विदेश मंत्री जयशंकर शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में भाग लेने के लिए इस समय पाकिस्तान में हैं। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, “एससीओ सीएचजी की बैठक हर साल होती है और इसमें संगठन के व्यापार के साथ-साथ आर्थिक एजेंडे पर भी ध्यान दिया जाता है। इस सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस जयशंकर कर रहे हैं। इस बीच विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने इस्लामाबाद में एससीओ परिषद के शासनाध्यक्षों की 23वीं बैठक को संबोधित किया।

आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान पर बरसे

SCO शिखर सम्मेलन में एस जयशंकर ने आतंकवाद और अलगाववाद को लेकर पाकिस्तान पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “आतंकवाद, अलगाववाद और कट्टरपंथ से बचना होगा। बेहतर संबंधों के लिए विश्वास जरूरी है। सभी की संप्रभुता का सम्मान करना महत्वपूर्ण है” एससीओ शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “जलवायु, आपूर्ति श्रृंखला, वित्तीय अस्थिरता सहित कई बाधाएं हैं जो विकास को प्रभावित करती हैं।” विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “SCO का पहला लक्ष्य आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद का मुकाबला करना है और वर्तमान समय में यह और भी महत्वपूर्ण हो गया है। एससीओ को इन तीनों बुराइयों से निपटने के लिए दृढ़ संकल्प लेना होगा।”

‘सभी की संप्रभुता का सम्मान जरूरी’

इससे पहले, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में एससीओ शिखर सम्मेलन स्थल पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर का स्वागत किया। उन्होंने साझा मुद्दों को सुलझाने के लिए एससीओ सदस्य देशों के बीच सहयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने क्षेत्र के भीतर स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि सहयोग आपसी सम्मान और संप्रभु समानता पर आधारित होना चाहिए, जिसमें क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को मान्यता दी जानी चाहिए। इसे एकतरफा एजेंडे पर नहीं, बल्कि वास्तविक साझेदारी पर बनाया जाना चाहिए। सीपीईसी की ओर इशारा करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, अगर हम व्यापार और व्यावसायिक मार्गों के लिए वैश्विक प्रथाओं का पालन करेंगे, तो एससीओ आगे नहीं बढ़ सकता।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की घोषणा 2015 में की गई थी। यह परियोजना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरती है, जिसे भारत अपना क्षेत्र मानता है। इसका उद्देश्य खाड़ी देशों से आने वाले तेल और गैस के प्रवाह को बढ़ाना है। इसे बंदरगाहों, रेलमार्गों और सड़कों के माध्यम से कम समय और कम लागत पर चीन तक लाया जाना है।

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