Monday, February 9, 2026
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मणिपुर के लोगों की रक्षा करना मेरा नैतिक कर्तव्य है- CM एन. बीरेन सिंह

मणिपुर में जातीय हिंसा धीरे-धीरे कम हो रही है। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने केंद्र की मदद से छह महीने में राज्य में पूरी तरह से अमन बहाली का वादा किया है। उन्होंने पद छोड़ने से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने न तो कोई अपराध किया है और न ही किसी घोटाले को अंजाम दिया है।

पीटीआई वीडियो के साथ बातचीत में बीरेन सिंह ने गुरुवार को पहली बार कहा कि उन्होंने कुकी और मैतेई नेताओं के साथ बातचीत करने के लिए एक दूत लगाया है। आधाकारिक आंकड़ों को मुताबिक दोनों संप्रदायों के बीच सांप्रदायिक संघर्षों में मई 2023 से अब तक 200 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।

बीरेन सिंह ने कहा, “ये बातचीत से ही हल हो सकता है। बातचीत ही इकलौता रास्ता है।”

बीरेन सिंह ने नागा विधायक और हिल एरिया कमेटी के अध्यक्ष डिंगंगलुंग गंगमेई को बातचीत के लिए दूत बनाया है।

जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने शांति बहाली करने के लिए क्या समयसीमा तय की है, तो उन्होंने संकेत दिया कि इस दिशा में बातचीत के साथ-साथ, गृह मंत्रालय या दूसरी एजेंसियों के जरिये केंद्र सरकार की भागीदारी अहम होगी।

उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि ये लंबे समय तक चलेगा। पांच-छह महीने के भीतर अमन बहाली हो जानी चाहिए। ये हमारी उम्मीद है और मुझे पूरा भरोसा भी है।”

उन्होंने कहा कि मैतेई हैं और कुकी उनपर काफी हद तक अविश्वास करते हैं। उन्होंने बार-बार जोर दिया कि जब वे आधिकारिक कुर्सी पर बैठे हैं तो उनकी पहचान मैतेई के रूप में नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं सभी के लिए मुख्यमंत्री हूं।”

मैतेई बहुल इंफाल पूरी तरह से सामान्य दिख रहा है। सड़कों पर ट्रैफिक है दुकानों का कारोबार अच्छा चल रहा है।

बीरेन सिंह ने कहा कि उनके संघर्ष की शुरुआत 2017-2022 में मुख्यमंत्री के रूप में उनके पहले कार्यकाल में हुई। उन्होंने पड़ोसी म्यांमार से अवैध ड्रग व्यापार और शरणार्थियों पर नकेल कसी थी। अंतरराष्ट्रीय सीमा इंफाल से महज 100 किलोमीटर दूर है।

उन्होंने संकेत दिया कि उनकी कार्रवाई से प्रभावित लोगों ने कुकी-मैतेई संघर्षों भड़काया उनकी सरकार को अस्थिर करने की साजिश रची।

कुकी ज्यादातर पहाड़ी इलाकों में रहने वाली ईसाई जनजातियां हैं, जबकि मैतेई मैदानी इलाकों और घाटियों में रहने वाले हिंदू हैं। कुकी जनजातियां म्यांमार में भी हैं।

बीरेन सिंह सिंह ने अपने दफ्तर में बातचीत के दौरान उपग्रह की तस्वीर दिखाते हुए कहा, जो इलाके 2001 में निर्जन थे, वहां 15 साल बाद घनी आबादी भर गई। उन्होंने कहा कि तस्वीरें अवैध बस्तियों के सबूत हैं, जो राज्य की डेमोग्राफी को बदल रही है।

बीरेन सिंह ने कहा कि मार्च 2023 में मणिपुर हाई कोर्ट बेंच के फैसले में मैतेई को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की सिफारिश की गई थी। इससे कुकी समुदाय में गुस्सा और बढ़ गया। उन्हें लगा कि उनके अधिकार कम किए जा रहे हैं।

हालांकि राज्य सरकार ने अदालत के आदेश को लागू नहीं किया, लेकिन तब तक कुकी छात्र गुटों का आंदोलन शुरू हो चुका था और जल्द ही ये पूरी तरह हिंसक हो गया। हाई कोर्ट ने इस साल फरवरी में अपने आदेश से एसटी दर्जे वाले पैराग्राफ को हटा दिया है।

इस संघर्ष से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी राजनैतिक आंच आई। विपक्ष और उनके आलोचकों ने संघर्ष दूर करने के लिए उनके मणिपुर का दौरा न करने की आलोचना की।

बीरेन सिंह ने कहा, “लोगों ने प्रधानमंत्री के आने या नहीं आने को मुद्दा बना लिया है। प्रधानमंत्री भले न आए हों, लेकिन उन्होंने अपने गृह मंत्री को भेजा है। प्रधानमंत्री ने मणिपुर के बारे में कई बार बात की है। यहां तक ​​कि स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से भी। यहां सुरक्षा, फंडिंग आदि के मामले में जो भी किया जा रहा है, वो उनकी अगुवाई में हो रहा है। जटिल परिस्थिति में प्रधानमंत्री का आना जरूरी नहीं था।”

उन्होंने ये साफ किया कि वे मैतेई समर्थक उग्रवादी संगठनों जैसे अरम्बाई टेंगोल को बर्दाश्त नहीं करेंगे। संगठन ने खुलेआम कुकी समुदाय के खिलाफ हिंसा की वकालत की है।

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