Sunday, February 8, 2026
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गणतंत्र दिवस पर एक नहीं ये 2 दिग्गज हो सकते हैं मुख्य अतिथि, भारत का ऐतिहासिक फैसला

भारत ने गणतंत्र दिवस 2026 के लिए एक ऐतिहासिक और कूटनीतिक रूप से बेहद अहम निर्णय लिया है। इस बार 26 जनवरी 2026 के भव्य समारोह में यूरोपीय संघ (EU) के दो शीर्ष नेता यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह पहली बार होगा जब किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन के दो सर्वोच्च नेता एक साथ भारत के इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे।

जनवरी 2026 में दोनों नेता नई दिल्ली पहुंचेंगे। इसे भारत और यूरोपीय संघ के बीच लगातार मजबूत होते रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक रिश्तों का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम भारत की बहु-ध्रुवीय विदेश नीति और वैश्विक साझेदारियों को और गहराई देने की दिशा में बड़ा संदेश है।

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औपचारिक घोषणा जल्द

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने बताया है कि यूरोपीय संघ के नेताओं को गणतंत्र दिवस 2026 का मुख्य अतिथि बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। नई दिल्ली और ब्रसेल्स के बीच जल्द ही औपचारिक निमंत्रण और उसकी स्वीकृति की सार्वजनिक घोषणा की जा सकती है।

गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस पर किसी विदेशी नेता को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करना केवल औपचारिकता नहीं होती, बल्कि यह भारत की विदेश नीति, रणनीतिक प्राथमिकताओं और वैश्विक दृष्टिकोण को दर्शाता है। ऐसे में यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेताओं का चयन अपने आप में बेहद प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक माना जा रहा है।

2025 में कौन थे मुख्य अतिथि

भारत हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाता है, जो 1950 में भारतीय संविधान के लागू होने की स्मृति का प्रतीक है। यह आयोजन न केवल भारत की लोकतांत्रिक विरासत को दर्शाता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मित्रता और सहयोग का मंच भी होता है। 2025 में गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो थे। वहीं 2026 में यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेताओं की मेजबानी भारत के कूटनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है।

भारत–यूरोपीय संघ रिश्तों में नई मजबूती

पिछले कुछ महीनों में भारत और 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ के बीच संबंधों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है। फरवरी में यूरोपीय आयोग के शीर्ष प्रतिनिधियों की भारत यात्रा के बाद दोनों पक्षों के बीच संवाद और सहयोग को नया आयाम मिला। इसके बाद 20 अक्टूबर को यूरोपीय संघ ने एक नई रणनीतिक एजेंडा को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य भारत–ईयू संबंधों को और व्यापक व गहरा बनाना है।

इस रणनीतिक एजेंडे में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देना, तकनीक, रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और जनसंपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना शामिल है। भारत और यूरोपीय संघ दोनों ही वैश्विक स्तर पर लोकतांत्रिक मूल्यों, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और सतत विकास को लेकर समान दृष्टिकोण रखते हैं।

कूटनीतिक दृष्टि से अहम कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि गणतंत्र दिवस 2026 में यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी से भारत–ईयू साझेदारी को नई दिशा मिलेगी। यह न सिर्फ आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को बढ़ावा देगा, बल्कि वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका और प्रभाव को भी मजबूत करेगा।

कुल मिलाकर, गणतंत्र दिवस 2026 भारत की विदेश नीति में एक मजबूत और स्पष्ट संदेश देगा—कि भारत वैश्विक साझेदारियों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है, और यूरोपीय संघ उसके प्रमुख रणनीतिक साझेदारों में शामिल है।

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