Saturday, February 7, 2026
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2024-25 में राजनीतिक पार्टियों को कितना मिला चंदा ECI ने रिपोर्ट सार्वजनिक की, BJP, कांग्रेस समेत बड़े दलों का पूरा लेखा-जोखा

भारत के चुनाव पर्यवेक्षक संस्था Election Commission of India (ECI) ने 2024-25 वित्तीय वर्ष के लिए राजनीतिक दलों को मिले चंदे (दान / योगदान) की रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले साल की तुलना में कई दलों को चंदे में बड़ा इजाफा हुआ है, तथा फंडिंग के स्वरूप में ट्रस्ट और कॉर्पोरेट दान का हिस्सा बढ़ा है।

प्रमुख जानकारियाँ – किसे कितना मिला

  • Bharatiya Janata Party (BJP) को 2024-25 में चुनावी ट्रस्टों (electoral trusts) के जरिये कुल ₹959 करोड़ का चंदा मिला।

  • Indian National Congress (कांग्रेस) को पूरे 2024-25 में कुल ₹517 करोड़ से अधिक का योगदान मिला, जिसमें से लगभग ₹313 करोड़ ट्रस्टों से थे।

  • रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल की शासक पार्टी All India Trinamool Congress (TMC) को 2024-25 में लगभग ₹184.5 करोड़ मिले, जिसमें से ₹153.5 करोड़ ट्रस्टों से प्राप्त हुए।

ट्रस्ट-मार्ग: दान का नया रास्ता

पिछले साल (2023-24) में जब Electoral Bond Scheme समाप्त हो गई थी, तभी से राजनीतिक चंदे के लिए ट्रस्टों (electoral trusts) का रास्ता प्रमुख हो गया। 2024-25 की रिपोर्ट में यही प्रवृत्ति साफ दिख रही है।

विशेष रूप से, Progressive Electoral Trust (PET), जो कि १५ कंपनियों के समूह Tata Group द्वारा संचालित है, ने कुल ₹915 करोड़ दान ट्रस्ट के रूप में भेजा। इनमें से लगभग ₹757.6 करोड़ (लगभग 83%) सीधे BJP को मिले। कांग्रेस को इसी ट्रस्ट से लगभग ₹77.3 करोड़ मिले।

चंदा व फंडिंग ढांचे में बदलाव

  • 2024-25 के आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि ट्रस्ट-आधारित दान (electoral trusts) राजनीतिक पार्टियों की फंडिंग का मुख्य ज़रिया बन चुका है।

  • 2023-24 में बड़े दान (₹20,000 से अधिक) की रिपोर्टों के आधार पर, राष्ट्रीय दलों ने कुल ₹2,544.28 करोड़ जमा किया था, जिसमें से BJP की हिस्सेदारी सबसे अधिक थी।

  • ट्रस्टों और विशेष रूप से PET द्वारा बड़े पैमाने पर फंडिंग से यह साफ हो गया है कि कॉर्पोरेट-मजबूत राजनीतिक फंडिंग मॉडल अब अधिक प्रभावी हो गया है।

क्या बताते हैं ये आंकड़े

  • चूंकि 2024 में लोकसभा चुनाव हुए थे, इसलिए चुनावी गतिविधियों के मद्देनज़र पार्टियों को दान में वृद्धि देखी गई।

  • ट्रस्ट आधारित फंडिंग ख़ासकर कॉर्पोरेट-समूहों द्वारा राजनीतिक दलों के लिए एक नया, मजबूत और अधिक संगठित मनी स्रोत बन चुका है।

  • इस डेटा की सार्वजनिक उपलब्धता से यह संभव हुआ है कि आम नागरिक, मीडिया और watchdogs (जाँच संस्थान) राजनीतिक फंडिंग पर निगरानी रख सकें।

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