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रेखा सरकार के जरिए BJP ने कैसे साधा जातीय समीकरण?
Monday, February 9, 2026
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रेखा सरकार के जरिए BJP ने कैसे साधा जातीय समीकरण?

दिल्ली में 27 साल बाद सत्ता में वापसी करने वाली भाजपा ने इस बार लंबी राजनीतिक पारी खेलने का फैसला किया है। यही वजह है कि भाजपा ने सरकार बनाने में जल्दबाजी नहीं की। चुनाव नतीजों के बाद 11 दिनों तक मंथन चलता रहा। उसके बाद मुख्यमंत्री के लिए रेखा गुप्ता के नाम पर मुहर लगने के साथ ही मंत्रिमंडल के लिए आधा दर्जन विधायकों के नाम भी फाइनल कर दिए गए। इस तरह भाजपा ने रेखा सरकार के मंत्रिमंडल के जरिए अपने कोर वोट बैंक का ख्याल रखने के साथ ही जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन साधने का मास्टर स्ट्रोक भी खेला है, जिसमें पश्चिमी और बाहरी दिल्ली का दबदबा देखने को मिला है।

रेखा गुप्ता आज दोपहर 12 बजे दिल्ली के रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी। इसके साथ ही मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले आधा दर्जन भाजपा नेता मंत्री पद की शपथ लेंगे। भाजपा ने रेखा गुप्ता के जरिए महिला वोटरों और वैश्य के समीकरण को साधने की कोशिश की है। इतना ही नहीं भाजपा ने रेखा गुप्ता के मंत्रिमंडल में जिन नेताओं को जगह दी है, उनके पीछे दिल्ली की सियासी केमिस्ट्री भी छिपी है। इस तरह भाजपा ने दिल्ली में अपनी राजनीतिक जड़ें लंबे समय तक बनाए रखने की योजना बनाई है।

रेखा सरकार में कौन-कौन बनेगा मंत्री

दिल्ली विश्वविद्यालय से छात्र राजनीति में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाली रेखा गुप्ता दिल्ली की मुख्यमंत्री बनने जा रही हैं। रेखा गुप्ता शालीमार बाग विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुनी गई हैं, जो दिल्ली की चौथी महिला सीएम होंगी। रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली की भाजपा सरकार में प्रवेश वर्मा, मनजिंदर सिंह सिरसा, आशीष सूद, पंकज सिंह, कपिल मिश्रा और रविंदर इंद्रराज सिंह कैबिनेट मंत्री के तौर पर शामिल होंगे। बुधवार को भाजपा ने रेखा गुप्ता मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले सभी छह मंत्रियों के नाम उपराज्यपाल वीके सक्सेना को भेज दिए हैं। इस तरह रेखा गुप्ता के साथ छह नेता मंत्री पद की शपथ लेंगे।

कैबिनेट के जरिए साधा जातीय समीकरण

रेखा सरकार के जरिए बीजेपी ने दिल्ली के राजनीतिक समीकरण को संतुलित करने की कोशिश की है। रेखा गुप्ता को सीएम बनाकर बीजेपी ने अपने कोर वोट बैंक वैश्य समुदाय को साधने की कोशिश की है और कैबिनेट के जरिए जाट, सिख, पंजाबी, दलित और पूर्वांचल वोटों को संतुलित करने की रणनीति बनाई है। इस तरह बीजेपी ने दिल्ली के साथ-साथ पूर्वांचल के जातीय समीकरण को भी संतुलित करने की कोशिश की है। इतना ही नहीं, बीजेपी ने केजरीवाल के वोट बैंक में सेंध लगाने की चाल चली है जो दिल्ली में उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

रेखा गणित से गड़बड़ाएगा AAP का गणित

दिल्ली में बीजेपी ने वैश्य समुदाय से आने वाली रेखा गुप्ता को सत्ता की बागडोर सौंपी है, वैश्य समुदाय को बीजेपी का कोर वोट बैंक माना जाता है। अरविंद केजरीवाल के राजनीति के मैदान में उतरने के बाद वैश्य समुदाय का एक बड़ा हिस्सा बीजेपी से अलग होकर आम आदमी पार्टी के साथ चला गया है। रेखा गुप्ता को सीएम बनाकर बीजेपी ने वैश्य समुदाय के वोटों में सेंधमारी की रणनीति बनाई है, जो केजरीवाल का कोर वोट बैंक माना जाता है।

केजरीवाल वैश्य समुदाय से आते हैं, दिल्ली में वैश्य समुदाय का वोट शेयर करीब 8 फीसदी है, जो काफी अहम माना जाता है, रेखा गुप्ता के जरिए केजरीवाल का सियासी गणित बिगाड़ने की रणनीति बनाई गई है, एक तरफ बीजेपी की रणनीति वैश्य समुदाय के वोट बटोरने की है, तो दूसरी तरफ महिलाओं को राजनीतिक संदेश भी देना चाहती है। दिल्ली में आधी आबादी यानी महिलाएं राजनीतिक पार्टियों का खेल बनाने या बिगाड़ने की ताकत रखती हैं।

दिल्ली को बेहतर तरीके से संवारने का काम महिला नेताओं ने किया है, चाहे मुगल काल में रजिया सुल्तान हों या शीला दीक्षित। इसीलिए भाजपा ने रेखा गुप्ता को सीएम बनाकर महिला वोट बैंक को राजनीतिक संदेश देने की चाल चली है।

जाट-पंजाबी-सिख समीकरण को तवज्जो

दिल्ली कैबिनेट के जरिए बीजेपी ने जाट-पंजाबी और सिख समीकरण साधने की कोशिश की है, प्रवेश वर्मा के जरिए जाट वोट बैंक को साधने की रणनीति है तो आशीष सूद के जरिए पंजाबी वोटों को राजनीतिक संदेश दिया गया है, मनजिंदर सिंह सिरसा के जरिए दिल्ली के सिख वोटों को साधने की रणनीति बनाई गई है। दिल्ली में 8 फीसदी जाट वोटर हैं और करीब 15 फीसदी पंजाबी वोटर हैं, इसके अलावा 4 फीसदी सिख वोटर हैं। इस विधानसभा चुनाव में जाट-पंजाबी-सिख वोटों का बड़ा झुकाव बीजेपी की तरफ देखने को मिला, दिल्ली में पंजाबी वोटर बीजेपी का कोर वोट बैंक रहा है, जिसके जरिए उसने जनसंघ के दौर की राजनीति में अपना दबदबा कायम रखा।

1993 में बीजेपी पंजाबी चेहरे को आगे करके दिल्ली की सत्ता में आई थी, लेकिन मदनलाल खुराना को हटाने के बाद पंजाबी वोटर बिखर गए हैं, इस बार बीजेपी ने आशीष सूद को कैबिनेट में जगह देकर पंजाबी वोटों को फिर से साथ रखने की कोशिश की है, इसी तरह, भाजपा ने जाट चेहरे के रूप में साहिब सिंह वर्मा को आगे करके अपनी जड़ें जमाई थीं और अब उनके बेटे प्रवेश वर्मा को मंत्रिमंडल में शामिल करके फिर से आगे बढ़ गई है।

मनजिंदर सिंह सिरसा दिल्ली में सिख समुदाय के बड़ा चेहरा माने जाते हैं, सिरसा शिरोमणि अकाली दल से बीजेपी में आए हैं। राजौरी गार्डन सीट से सिरसा विधायक बने हैं। इससे पहले दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इस तरह सिख समुदाय के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है, जिसके चलते बीजेपी उन्हें कैबिनेट में जगह दी है। दिल्ली के साथ-साथ पंजाब के सिख वोटों को बीजेपी सियासी संदेश देना चाहती है।

पूर्वांचल-दलित-ब्राह्मण समीकरण का रखा ख्याल

रेखा गुप्ता की कैबिनेट में दिल्ली के राजनीतिक समीकरणों का ख्याल रखा गया है, जिसके चलते एक पूर्वांचल नेता को मंत्री बनाया गया है और एक दलित और एक ब्राह्मण चेहरे को भी जगह दी गई है। रेखा सरकार में पूर्वांचल चेहरे के तौर पर बीजेपी बिहार से आने वाले पंकज सिंह को मंत्री बना रही है। दिल्ली में करीब 25 फीसदी वोटर पूर्वांचल से हैं, जिसके लिए पंकज सिंह पर दांव लगाया गया है। इसके अलावा उनके जरिए ठाकुर वोटों को भी राजनीतिक संदेश दिया गया है। इसके अलावा ब्राह्मण चेहरे के तौर पर कपिल मिश्रा को कैबिनेट में जगह दी गई है, जो आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आए हैं। वह आक्रामक हिंदुत्व की राजनीति करते हैं और करीब 10 फीसदी ब्राह्मण वोटों को लुभाने का दांव लगाया गया है।

बीजेपी ने दलित चेहरे के तौर पर रविंदर इंद्रराज सिंह को कैबिनेट में जगह दी है। दिल्ली में करीब 17 फीसदी वोट दलित समुदाय के हैं, जिस पर बीजेपी की लंबे समय से नजर है। दलितों का एक बड़ा तबका अभी भी आम आदमी पार्टी के साथ है। रविंदर इंद्रराज सिंह को मंत्री बनाकर बीजेपी ने पंजाब के साथ-साथ दलित और ग्रामीण समुदाय को भी लुभाने का दांव चला है। रविंदर इंद्रराज सिंह पंजाबी धार्मिक दलित समुदाय से आते हैं। इस तरह से बीजेपी ने उनके जरिए बड़ा दांव चला है।

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