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Haryana : ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ सरकार ने हड़ताली डॉक्टरों पर लगाया 'ESMA'
Monday, February 9, 2026
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Haryana : ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ सरकार ने हड़ताली डॉक्टरों पर लगाया ‘ESMA’

हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (एचसीएमएसए) और राज्य सरकार के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मंगलवार को आंदोलन के दूसरे दिन भी डॉक्टरों की हड़ताल जारी रही, जिसके चलते यमुनानगर, पानीपत, फतेहाबाद, जींद, कैथल, हिसार, झज्जर और दादरी में स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित रहीं।

सरकार ने क्यों लागू किया ‘एस्मा’ ?

स्थिति न बिगड़े, इसके लिए प्रदेश सरकार ने आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू करते हुए छह महीने तक हड़ताल पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि “No Work, No Pay” नीति लागू रहेगी।

लेकिन सरकार के इन कदमों का एचसीएमएसए पर कोई प्रभाव दिखाई नहीं दिया। संगठन ने अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल को जारी रखने का ऐलान करते हुए कहा है कि मांगों के पूरा होने तक सरकारी अस्पतालों में ओपीडी, इमरजेंसी और सभी प्रमुख सेवाएं बंद रहेंगी। बुधवार से आमरण अनशन शुरू करने की भी तैयारी की जा रही है।

क्या है एस्मा ?

आवश्यक सेवाएँ-जैसे बिजली, पानी, सार्वजनिक परिवहन, स्वास्थ्य सेवाएँ और पेट्रोलियम आपूर्ति-लोगों के दैनिक जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इन्हें किसी भी तरह की हड़ताल या बाधा से बचाने के उद्देश्य से सरकार आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम लागू कर सकती है। यही अधिनियम एस्मा कहलाता है।

मरीजों की सेवाएं नहीं होंगी बाधित

सरकार और एसोसिएशन के बीच सीनियर मेडिकल ऑफिसर (एसएमओ) की सीधी भर्ती रोकने को लेकर समझौता बन गया है, लेकिन एश्योर्ड करियर प्रमोशन (एसीपी) पर अभी भी गतिरोध बरकरार है। मरीजों को राहत देने के लिए सरकार ने रोहतक, अंबाला, भिवानी, सिरसा और कुरुक्षेत्र के मेडिकल कॉलेजों के जूनियर-सीनियर रेजिडेंट, साथ ही एनएचएम, ईएसआई और आयुष विभाग के डॉक्टरों को ओपीडी और इमरजेंसी ड्यूटी में लगाया हुआ है। इन जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं लगभग सामान्य बनी हुई हैं।

हालांकि, बाकी जिलों में हड़ताल का असर साफ दिख रहा है और मरीजों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद सरकार ने निर्देश दिया है कि जरूरत पड़ने पर सिविल सर्जन निजी विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं भी ले सकते हैं, ताकि जरूरी उपचार प्रभावित न हो।

सीनियर डॉक्टर ने सरकार पर लगाया आरोप

एसोसिएशन के राज्य प्रधान डॉ. राजेश ख्यालिया ने आरोप लगाया कि कई बार अनुरोध भेजने के बाद भी सरकार ने न तो बातचीत का प्रस्ताव दिया और न ही कोई समाधान प्रस्तुत किया है। उनकी कार्यकारिणी ने निर्णय लिया है कि मांगों की स्वीकृति या बातचीत से बनी सहमति तक सभी सरकारी डॉक्टर पूरी तरह से सेवाएं बंद रखेंगे।

स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने अधिकारियों के साथ की बैठक

उधर स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने हालात की समीक्षा करते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने दावा किया कि दो दिनों से जारी हड़ताल के बावजूद जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। मेडिकल कॉलेजों, एनएचएम, ईएसआई, आयुष तथा आयुष्मान भारत के डॉक्टर लगातार मरीजों का उपचार कर रहे हैं, जिससे महत्वपूर्ण सेवाएं बिना व्यवधान के चल रही हैं।

सरकार मांगों पर गंभीरता से कर रही विचार

मंत्री ने कहा कि सरकार डॉक्टरों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है और उम्मीद है कि स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी। उन्होंने डॉक्टरों से कर्तव्य पर लौटने की अपील भी की। ध्यान रहे कि आम जनता को मिलने वाली आवश्यक सेवाएँ-जैसे बिजली, पानी, परिवहन, अस्पताल और पेट्रोलियम-हड़ताल से प्रभावित न हों, इसी उद्देश्य से एस्मा लागू किया जाता है।

यह कानून सरकार को हड़ताल पर रोक लगाने, नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई करने और आवश्यक होने पर बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार भी देता है। एस्मा अधिकतम छह महीने तक लागू रह सकता है, जिसे सरकार आवश्यकता पड़ने पर बढ़ा भी सकती है।

यह भी पढ़ें : नवजोत कौर सिद्धू ने प्रधान मिट्‌ठू मदान को भेजा लीगल नोटिस…

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