Notice: Function amp_has_paired_endpoint was called incorrectly. Function called while AMP is disabled via `amp_is_enabled` filter. The service ID "paired_routing" is not recognized and cannot be retrieved. Please see Debugging in WordPress for more information. (This message was added in version 2.1.1.) in /home/mhonecpanel/public_html/news.mhone.in/wp-includes/functions.php on line 6131
हर मोर्चे पर अमेरिका पर निर्भर यूरोप: क्यों US के बिना नहीं चल पाएगा EU?
Sunday, February 8, 2026
Google search engine
HomeCurrent Newsहर मोर्चे पर अमेरिका पर निर्भर यूरोप: क्यों US के बिना नहीं...

हर मोर्चे पर अमेरिका पर निर्भर यूरोप: क्यों US के बिना नहीं चल पाएगा EU?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने सख्त रुख से यूरोप को चौंका दिया है। ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ती तनातनी के बीच ट्रंप प्रशासन ने यूरोप के 8 देशों पर 10 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। हैरानी की बात यह है कि ये सभी देश नाटो (NATO) के सदस्य हैं, यानी अमेरिका के रणनीतिक सहयोगी।
टैरिफ की घोषणा के साथ ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका कई दशकों से डेनमार्क समेत पूरे यूरोपीय संघ की सुरक्षा करता आ रहा है और बदले में उसे कुछ भी नहीं मिला। अब समय आ गया है कि यूरोप “कर्ज चुकाए”।

ट्रंप के इस बयान और फैसले के बाद एक बड़ा सवाल उठता है क्या यूरोप वाकई अमेरिका पर इतना निर्भर है कि वह खुलकर जवाब भी नहीं दे पा रहा? गहराई से देखने पर कई ऐसे तथ्य सामने आते हैं, जो इस सवाल का जवाब “हां” में देते हैं।

नाटो की रीढ़ है अमेरिका

यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा आधार नाटो है, लेकिन नाटो की असली ताकत अमेरिका ही है। नाटो की कुल सैन्य क्षमता का 70% से अधिक योगदान अकेले अमेरिका का है। यूरोप की न्यूक्लियर डिटरेंस भी अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस पर निर्भर है।
रूस जैसे देशों का मुकाबला करने के लिए मिसाइल डिफेंस, सैटेलाइट इंटेलिजेंस, लॉन्ग-रेंज लॉजिस्टिक्स और हाई-एंड सैन्य सपोर्ट अमेरिका ही उपलब्ध कराता है। अगर अमेरिका पीछे हट जाए, तो नाटो सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा।

हथियार और सैन्य तकनीक में भी निर्भरता

यूरोप के पास सैनिकों और टैंकों की कमी नहीं है, लेकिन आधुनिक युद्ध की जरूरतें अलग हैं। एयर डॉमिनेंस, ड्रोन वॉरफेयर, लॉन्ग-रेंज मिसाइल सिस्टम और ग्लोबल मिलिट्री लॉजिस्टिक्स में यूरोप अब भी अमेरिका पर निर्भर है।
यूक्रेन युद्ध इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां यूरोप को हथियारों, खुफिया जानकारी और रणनीतिक सपोर्ट के लिए बार-बार अमेरिका की ओर देखना पड़ा।

आर्थिक ताकत में भी अमेरिका आगे

आर्थिक मोर्चे पर भी अमेरिका यूरोप से कहीं ज्यादा मजबूत है। 2025 में पूरे यूरोप की संयुक्त अर्थव्यवस्था करीब 19.99 ट्रिलियन डॉलर आंकी जा रही है, जबकि अकेले अमेरिका की अर्थव्यवस्था 30.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
इसके अलावा, ज्यादातर यूरोपीय देश अपने GDP का 2% भी रक्षा पर खर्च नहीं करते। अगर अमेरिका सुरक्षा से पीछे हटता है, तो यूरोप को रक्षा बजट 2–3 गुना बढ़ाना पड़ेगा। इसका सीधा असर टैक्स बढ़ने और वेलफेयर योजनाओं में कटौती के रूप में दिखेगा।

ऊर्जा और सप्लाई चेन में अमेरिका अहम

रूस पर प्रतिबंधों के बाद यूरोप की ऊर्जा निर्भरता अमेरिका पर और बढ़ गई है। आज अमेरिका यूरोप के लिए LNG का सबसे बड़ा सप्लायर बन चुका है।
जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड और इटली ने नए LNG टर्मिनल बनाए हैं और भारी मात्रा में अमेरिका से गैस आयात कर रहे हैं। कच्चे तेल के मामले में भी यूरोप अमेरिका, नॉर्वे और मध्य-पूर्व पर निर्भर हो गया है। अमेरिका से यूरोप को क्रूड ऑयल का निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है।

हाईटेक चिप्स में भी US पर भरोसा

डिफेंस, AI, सैटेलाइट और मिसाइल सिस्टम के लिए जरूरी हाईटेक सेमीकंडक्टर्स की सप्लाई में भी अमेरिका की भूमिका अहम है। यूरोप अभी इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर नहीं हो पाया है।

क्या कभी आत्मनिर्भर बन पाएगा यूरोप?

विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप धीरे-धीरे अमेरिका पर निर्भरता कम कर सकता है, लेकिन यह आसान नहीं होगा। इसमें 15 से 20 साल लग सकते हैं।
इसके लिए यूरोप को संयुक्त EU सेना बनानी होगी, रक्षा उद्योग में बड़े पैमाने पर निवेश करना होगा, जर्मनी और फ्रांस को नेतृत्व संभालना होगा और अमेरिकी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता घटानी होगी।फिलहाल, हकीकत यही है कि सुरक्षा से लेकर अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी तक यूरोप आज भी अमेरिका के बिना अधूरा नजर आता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments