Sunday, February 8, 2026
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Chandigarh: BJP आज कर सकती है मेयर प्रत्याशी का ऐलान, विनोद तावड़े बने चुनाव पर्यवेक्षक

भारतीय जनता पार्टी (BJP) आज चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर पद के लिए अपने प्रत्याशी के नाम पर फैसला ले सकती है। इसके साथ ही सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए भी उम्मीदवारों की घोषणा होने की संभावना है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के निर्देश पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को चंडीगढ़ मेयर चुनाव का चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है।

इस संबंध में जारी आदेश में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह ने बताया कि विनोद तावड़े की यह नियुक्ति 20 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी। पार्टी नेतृत्व ने संगठनात्मक समन्वय, चुनावी रणनीति को मजबूत करने और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपी है।

चंडीगढ़ पहुंचकर करेंगे रणनीति की समीक्षा

भाजपा सूत्रों के अनुसार, विनोद तावड़े चंडीगढ़ में पार्टी नेताओं और पार्षदों से मुलाकात कर चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे। वे मेयर चुनाव के दौरान संगठन की गतिविधियों पर नजर रखेंगे और समन्वय स्थापित करेंगे। इस नियुक्ति को नगर निगम में होने वाले मेयर चुनाव के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दो पार्षदों के आने से बदला गणित

2021 में हुए नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) के 14 पार्षद जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, जबकि भाजपा के 12 और कांग्रेस के 8 पार्षद चुने गए थे। हालांकि, नगर निगम के अंतिम वर्ष में समीकरण बदल चुके हैं। भाजपा के पास अब 18 पार्षद हो गए हैं। 24 दिसंबर को AAP की दो पार्षद सुमन और पूनम ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था, जिसके बाद से मेयर चुनाव का गणित काफी हद तक भाजपा के पक्ष में आ गया है।

चंडीगढ़ में BJP के मेयर बनने के दो संभावित सिनेरियो

एक और पार्षद की जरूरत:

इस बार मेयर चुनाव सीक्रेट बैलेट से नहीं, बल्कि हाथ उठाकर वोटिंग के जरिए होगा। ऐसे में क्रॉस वोटिंग की गुंजाइश नहीं रहेगी। निगम में कुल 35 पार्षद और एक सांसद का वोट मान्य होगा। दो पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के बाद भी भाजपा और विपक्ष (AAP + कांग्रेस) के पास 18-18 वोट हैं। भाजपा को स्पष्ट जीत के लिए एक और पार्षद का समर्थन चाहिए, ताकि उनके पास 19 वोट हो सकें।

एक गैरहाजिरी से सीधी जीत:

यदि मेयर चुनाव के दिन कांग्रेस या AAP का कोई पार्षद बीमारी या किसी अन्य कारण से अनुपस्थित रहता है, तो विपक्ष का एक वोट कम हो जाएगा। ऐसी स्थिति में भाजपा अपने 18 पार्षदों के बल पर ही मेयर बनाने में सफल हो सकती है।

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