Sunday, February 8, 2026
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डिजिटल अरेस्ट को लेकर SC में केंद्र की रिपोर्ट दाखिल, CBI करेगी सभी मामलों की जांच

डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान में लिए गए प्रकरण में केंद्र सरकार ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है। इस मामले पर मंगलवार को शीर्ष अदालत में सुनवाई प्रस्तावित है। केंद्र ने कोर्ट को अवगत कराया है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी बढ़ती और गंभीर साइबर ठगी को ध्यान में रखते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इससे निपटने के लिए एक ठोस कार्ययोजना पर काम चल रहा है।

FIR को CBI को सौंपा

केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 16 दिसंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया है। इसके बाद सीबीआई ने 9 जनवरी को इस मामले में नई एफआईआर दर्ज की। इस जांच का उद्देश्य डिजिटल अरेस्ट से जुड़े अपराधों के पीछे सक्रिय नेटवर्क और पूरे तंत्र की गहन पड़ताल करना है।

अंतर-विभागीय समिति का गठन

स्टेटस रिपोर्ट में यह जानकारी भी दी गई है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार गृह मंत्रालय ने डिजिटल अरेस्ट की चुनौती से निपटने के लिए एक उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता गृह मंत्रालय में आंतरिक सुरक्षा के विशेष सचिव कर रहे हैं।

समिति में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, विदेश मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग, विधि मंत्रालय, उपभोक्ता मामले मंत्रालय, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई), सीबीआई, एनआईए, दिल्ली पुलिस और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। I4C के सीईओ को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है।

केंद्रीय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से किया अनुरोध

रिपोर्ट के अनुसार, समिति की पहली बैठक 29 दिसंबर को आयोजित हुई, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और एमिकस क्यूरी द्वारा दिए गए सुझावों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद 2 जनवरी को एमिकस क्यूरी के साथ एक विशेष बैठक हुई, जिसमें दूरसंचार विभाग, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, आरबीआई और I4C के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से सुझाव एकत्र कर एक व्यापक और प्रभावी रणनीति तैयार करने के लिए उसे कम से कम एक महीने का अतिरिक्त समय दिया जाए, ताकि डिजिटल अरेस्ट जैसी गंभीर और संगठित साइबर अपराध की समस्या से मजबूती से निपटा जा सके।

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