Sunday, February 8, 2026
Google search engine
HomeCurrent Newsकैप्टन शुभांशु शुक्ला को कर्तव्य पथ पर अशोक चक्र से किया गया...

कैप्टन शुभांशु शुक्ला को कर्तव्य पथ पर अशोक चक्र से किया गया सम्मानित

गणतंत्र दिवस के अवसर पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांति-कालीन वीरता सम्मान अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। भारत में प्रतिभा और साहस की मिसालें देने वालों की कमी नहीं है, लेकिन शुभांशु शुक्ला की उपलब्धि ने एक अलग ही इतिहास रच दिया है। उनकी सफलता की यह उड़ान आज हर ओर चर्चा का विषय बनी हुई है।

गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय वायुसेना के इस जांबाज़ अधिकारी-जो अब अंतरिक्ष यात्री भी हैं-को अशोक चक्र प्रदान करने की मंजूरी दी। इसके साथ ही शुभांशु शुक्ला यह सम्मान पाने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री बन गए, जो शांति काल में दिया जाने वाला सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है।

साहस सिर्फ युद्धभूमि तक सीमित नहीं…

शुभांशु की कहानी इस बात का प्रमाण है कि साहस सिर्फ युद्धभूमि तक सीमित नहीं होता, बल्कि अंतरिक्ष की अनंत ऊँचाइयों तक भी पहुँच सकता है। लखनऊ की गलियों में सपने देखने वाला एक युवक, जब स्पेसक्राफ्ट के कंट्रोल तक पहुँचा, तो उसने भारत के अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक नया अध्याय लिख दिया।

राकेश शर्मा की ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा के 41 वर्षों बाद शुभांशु की उड़ान ने उस लंबे अंतराल को समाप्त किया और करोड़ों युवाओं के लिए नई उम्मीद जगा दी। यह सम्मान केवल तकनीकी दक्षता का नहीं, बल्कि कक्षा (ऑर्बिट) में इंसानी सीमाओं को आगे बढ़ाने के अदम्य साहस का भी प्रतीक है।

लखनऊ से अंतरिक्ष तक की प्रेरक यात्रा

लखनऊ में जन्मे ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने महज 17 वर्ष की उम्र में अपने भविष्य की दिशा तय कर ली थी। कारगिल युद्ध और भारतीय वायुसेना के एयर शो से प्रभावित होकर उन्होंने अपने माता-पिता को बताए बिना, एक दोस्त के फॉर्म का इस्तेमाल कर नेशनल डिफेंस एकेडमी के लिए आवेदन कर दिया।

भारतीय वायुसेना में कब हुए शामिल ?

साल 2006 में वे भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में शामिल हुए। अपने करियर के दौरान उन्होंने Su-30MKI, MiG-21, MiG-29, Jaguar और Hawk जैसे अत्याधुनिक विमानों पर 2,000 घंटे से अधिक उड़ान भरी। आगे चलकर वे टेस्ट पायलट और कॉम्बैट लीडर बने। उन्होंने IISc बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री भी हासिल की।

साल 2019 में ISRO ने उन्हें गगनयान मिशन के लिए चुना। इसके बाद शुभांशु ने रूस के यूरी गगारिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में कड़ी ट्रेनिंग ली और NASA व ISRO के संयुक्त सत्रों में भी भाग लिया। इस प्रतिष्ठित मिशन के लिए चुने गए चार अंतिम उम्मीदवारों में वे एक थे।

यह भी पढें : केंद्र सरकार ने किया पद्म पुरस्कार का ऐलान, दिवंगत अभिनेता धर्मेन्द्र समेत 5…

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments