Sunday, February 8, 2026
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Uttar Pradesh : बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री सस्पेंड, जांच समिति गठित, प्रशासनिक गलियारों में मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को लेकर बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। उनके इस्तीफे के बाद राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से उन्हें सस्पेंड कर दिया है और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है।सरकारी आदेश के मुताबिक, बरेली मंडल के मंडलायुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच पूरी होने तक अलंकार अग्निहोत्री को शामली के जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध किया गया है। प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

इस्तीफे के पीछे की वजह और आरोप
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे के पीछे UGC नियमों और प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के कथित अपमान को कारण बताया है। इस्तीफे के बाद उन्होंने प्रशासन पर गंभीर आरोप भी लगाए। उनका दावा है कि उन्हें बातचीत के बहाने जिलाधिकारी आवास बुलाया गया, जहां कथित तौर पर उन्हें बंधक बनाकर रखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति बिगड़ने पर उन्होंने एक वरिष्ठ सचिव को फोन कर इसकी जानकारी दी थी और उस समय पुलिस कप्तान भी मौके पर मौजूद थे। हालांकि राज्य सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।

संघर्षों से प्रशासनिक सेवा तक का सफर
अलंकार अग्निहोत्री मूल रूप से कानपुर के रहने वाले हैं। बचपन में ही पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उन पर आ गई थी। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और प्रशासनिक सेवा तक का सफर तय किया।

उन्होंने बीटेक और एलएलबी की पढ़ाई की है और वर्ष 2016 की UPPSC परीक्षा में 15वीं रैंक हासिल की थी। वर्ष 2019 में उन्होंने उन्नाव में एसडीएम के रूप में कार्यभार संभाला। इसके बाद बलरामपुर और एटा में भी एसडीएम के पद पर सेवाएं दीं। बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट बनने से पहले वे लखनऊ नगर निगम में असिस्टेंट म्युनिसिपल कमिश्नर के रूप में तैनात थे। फिलहाल यह पूरा मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों ही स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है, जिसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों और सरकारी कार्रवाई के पीछे की वास्तविक स्थिति क्या है।

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