Sunday, February 8, 2026
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क्या पाकिस्तान की राह पर है बांग्लादेश ? दोनों देशों में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं…

बांग्लादेश में 5 अगस्त 2024 को तख्तापलट हुआ। तख्तापलट के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना देश छोड़कर राजनीतिक शरण के लिए भारत आ गईं। इसके बाद से ही बांग्लादेश में हालात खराब हैं। फिलहाल वहां के अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस हैं। बता दें कि 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव होने हैं। हालांकि ताजा जानकारी के अनुसार बांग्लादेश में शेख हसीना विरोधी एक और नेता पर हमला हुआ है। यह हमला सोमवार दोपहर 12 बजे हुआ।

NCP नेता मोहम्मद मोतालेब शिकदर पर हमला

बांग्लादेश में शेख हसीना विरोधी एक और नेता पर हमला हुआ है, जिनका नाम मोहम्मद मोतालेब शिकदर है। बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक, सोमवार दोपहर 12 बजे हमलावरों ने उनके घर में घुसकर गोली मार दी। गोली सिर पर लगने के कारण मोहम्मद मोतालेब शिकदर गंभीर रूप से घायल हो गए। हालांकि मौके पर मौजूद लोग उन्हें खुलना मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर गए, जहां उनका इलाज किया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि गोली उनके एक कान से होते हुए त्वचा को चीरते हुए दूसरे कान से बाहर निकल गई, जिससे उन्हें किसी प्रकार की अंदरूनी चोट नहीं लगी है।

कौन हैं NCP नेता मोहम्मद मोतालेब शिकदर ?

NCP नेता मोहम्मद मोतालेब शिकदर खुलना डिवीजन के प्रमुख हैं और मजदूर संगठन NCP श्रमिक शक्ति के आयोजक भी हैं। वह जल्द ही खुलना में मजदूर रैली करने वाले थे और उसी की तैयारी में जुटे हुए थे। बता दें कि NCP उन्हीं छात्रों से बनी पार्टी है, जिसने पिछले साल बांग्लादेश में बड़ा आंदोलन खड़ा किया था, जिसके बाद शेख हसीना का तख्तापलट हुआ।

उस्मान हादी छात्र नेता की हत्या से दहला बांग्लादेश

NCP नेता मोहम्मद मोतालेब शिकदर पर हमले से कुछ दिन पहले ढाका में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शरीफ उस्मान हादी छात्र संगठन इंकलाब मंच के संस्थापक थे। उनकी हत्या के बाद बांग्लादेश के कई इलाकों में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए। इसी दौरान मीडिया दफ्तर द डेली स्टार के कार्यालय पर भी हमला हुआ, जब वहाँ करीब 30 पत्रकार मौजूद थे।

कट्टरपंथी भीड़ ने दीपू चंद्र दास की हत्या

बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरता अपने चरम पर पहुंच गई है। गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले दीपू चंद्र दास ने धर्म से जुड़ा एक बयान दिया था, जिसके बाद कट्टरपंथी भीड़ ने मैमनसिंह में पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि बांग्लादेश पुलिस उस समय घटनास्थल पर नहीं पहुंच सकी। जानकारी के अनुसार, दीपू के साथ काम करने वाले एक व्यक्ति ने बदला लेने के इरादे से यह अफवाह फैलाई कि दीपू ने पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया है। इसके बाद कट्टरपंथी भीड़ ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया और पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी। दीपू की मौत के बाद उग्र भीड़ ने उनके शव को पेड़ से बांधकर जला दिया।

पुलिस ने क्या एक्शन लिया ?

धार्मिक कट्टरता के कारण हुई इस हत्या से लोगों में भारी गुस्सा है। पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 2 और लोगों को गिरफ्तार किया है। अब तक इस मामले में कुल 12 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

भारत ने क्या प्रतिक्रिया दी ?

इस मामले पर भारत ने कड़ा रूख अपनाया है। इसी कड़ी में 20 दिसंबर 2025 को दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के सामने युवाओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने दीपू चंद्र दास की हत्या के खिलाफ नारे लगाए और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग की। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत बांग्लादेश में विकसित हो रही स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हमारे अधिकारी बांग्लादेशी अधिकारियों के संपर्क में हैं और अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर गंभीर चिंता जता चुके हैं। हमने यह भी आग्रह किया है कि दास की बर्बर हत्या के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए।

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने लगाए आरोप

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश में बढ़ रहे भारत-विरोधी माहौल के लिए अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस को निशाना बनाते हुए कहा कि यह दुश्मनी आम लोगों की नहीं, बल्कि कट्टरपंथी ताकतों की देन है।

क्यों भड़की थी बांग्लादेश में हिंसा ?

बांग्लादेश में प्रदर्शन 15 जुलाई 2024 को हिंसक हो गए, जब कोटा प्रणाली को लेकर तत्कालीन शेख हसीना सरकार ने बदलाव किए। पहले कोटा प्रणाली में 1971 के मुक्ति संग्राम में लड़ने वालों के बच्चों और पोते-पोतियों के लिए 30 प्रतिशत, महिलाओं के लिए 10 प्रतिशत, पिछड़े जिलों के लिए 10 प्रतिशत, आदिवासी समुदायों के लिए 5 प्रतिशत और अल्पसंख्यकों के लिए 1 प्रतिशत आरक्षण था, जो कुल मिलाकर 56 प्रतिशत होता था। बाद में सरकार ने इसे बदलकर योग्यता-आधारित भर्ती को 93 प्रतिशत कर दिया और शेष 7 प्रतिशत में 5 प्रतिशत स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों और पोते-पोतियों के लिए, 1 प्रतिशत छोटे जातीय समुदायों के लिए और 1 प्रतिशत दिव्यांग व ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए आरक्षित किया। फिलहाल बांग्लादेश में यही कोटा प्रणाली लागू है।

तख्तापलट के बाद बांग्लादेश छोड़कर गईं शेख हसीना

पिछले साल छात्रों के विरोध प्रदर्शन के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश छोड़कर भारत में राजनीतिक शरण लेनी पड़ी। वह तब से भारत में ही हैं। ऐसे ही हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में अल्पसंख्यक खतरे में हैं और वही अब बांग्लादेश में हो रहा है। पाकिस्तान में सत्ता अक्सर सेना चलाती है और वैसे ही हालात बांग्लादेश में हो रहा है। इसलिए हम कह रहे हैं कि क्या पाकिस्तान की राह पर है बांग्लादेश चल रहा है।

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