Saturday, February 7, 2026
Google search engine
HomeCurrent Newsबांग्लादेश ने दिया भारत को धोखा, ड्रोन बनाने के लिए 850 एकड़...

बांग्लादेश ने दिया भारत को धोखा, ड्रोन बनाने के लिए 850 एकड़ जमीन चीन को सौंपी

बांग्लादेश ने चटगांव के मीरसराय क्षेत्र में भारत को आवंटित स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) की करीब 850 एकड़ जमीन आधिकारिक तौर पर रद्द कर दी है। अंतरिम सरकार के इस फैसले के बाद अब यही भूमि चीन को ड्रोन निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए दे दी गई है।

ड्रोन फैक्ट्री साल के अंत तक शुरू

नई योजना के तहत चीन यहां मीडियम रेंज और वर्टिकल टेकऑफ-लैंडिंग (VTOL) ड्रोन बनाएगा। बांग्लादेश सरकार के मुताबिक, प्लांट में इस साल के अंत तक उत्पादन शुरू हो जाएगा। चीन ने ड्रोन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी सहमति दे दी है। यह प्लांट भारतीय सीमा से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा, जिससे रणनीतिक चिंताएं भी बढ़ गई हैं। इसके साथ ही बांग्लादेश दक्षिण एशिया में भारत और पाकिस्तान के बाद ड्रोन निर्माण करने वाला तीसरा देश बन जाएगा।

स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) में लगभग 850 एकड़ जमीन भारत को आवंटित की गई थी।

कैसे मिली थी भारत को यह जमीन?

भारत और बांग्लादेश के बीच 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ढाका यात्रा के दौरान समझौता हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ संयुक्त घोषणा में भारतीय निवेशकों के लिए इंडियन इकोनॉमिक जोन (IEZ) स्थापित करने का फैसला लिया गया। यह परियोजना गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट फ्रेमवर्क पर आधारित थी। इसलिए, भारत ने करीब 115 मिलियन डॉलर की LoC मंजूर दी थी।

SEZ से भारत को मिलने वाले फायदे

इस SEZ से भारतीय कंपनियों को टैक्स छूट, ड्यूटी-फ्री आयात, सस्ती लॉजिस्टिक्स और बांग्लादेश की कम लागत वाली कर्मचारियों का लाभ मिलने वाला था। इससे भारत का निर्यात बढ़ता, उत्तर-पूर्वी राज्यों की कनेक्टिविटी मजबूत होती और दक्षिण एशिया की सप्लाई चेन में भारत की पकड़ मजबूत होती।

क्यों हुई परियोजना रद्द?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, स्वीकृत फंड का केवल 1% ही उपयोग हो सका। भारतीय ठेकेदारों की सीमित रुचि और परियोजना की धीमी प्रगति भी इसकी वजह बनी। इसके अलावा 2024 में शेख हसीना सरकार के हटने के बाद मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने अक्टूबर 2025 तक इस परियोजना को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया। जनवरी 2026 में BEZA ने घोषणा की कि खाली पड़ी जमीन को अब डिफेंस या मिलिट्री इकोनॉमिक जोन के रूप में विकसित किया जाएगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments