Saturday, February 7, 2026
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Uttar Pradesh : राम मंदिर में धर्मध्वज फहराने के बाद PM मोदी बोले- “राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं”, जानें 7 बड़ी बातें

श्री राम जन्मभूमि मंदिर में इतिहास रच दिया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और अभिजीत मुहूर्त के शुभ संयोग में मंदिर के स्वर्ण शिखर पर धर्मध्वजा फहराई गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पवित्र अवसर पर भगवान श्रीराम को नमन किया और इस ध्वजारोहण को भारत की सांस्कृतिक चेतना और आस्था का ऐतिहासिक क्षण बताया।

रामनगरी में उत्सव का माहौल

धर्मध्वज फहराते ही अयोध्या जय श्री राम के नारों से गूंज उठी। शहर की सड़कों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सात सांस्कृतिक मंचों पर लोक कलाकारों ने भक्ति गीतों और नृत्य से माहौल को भव्य बना दिया। संतों, महंतों और हजारों लोगों ने इस ऐतिहासिक क्षण को यादगार बना दिया।

“2047 तक विकसित बनेगा भारत” – PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि, ‘पिछले 11 वर्षों में महिला, दलित, पिछड़े, अति-पिछड़े, आदिवासी, वंचित, किसान, श्रमिक, युवा हर वर्ग को विकास के केंद्र में रखा गया है.’ जब देश का हर व्यक्ति, हर वर्ग, हर क्षेत्र सशक्त होगा, तब संकल्प की सिद्धि में सबका प्रयास लगेगा और सबके प्रयास से ही 2047 में जब देश आजादी के 100 साल मनाएगा, तब तक हमें विकसित भारत का निर्माण करना ही होगा।

“गुलामी के प्रतीकों को हटाना जरूरी” – PM मोदी

उन्होंने आगे कहा कि अभी गुलामी की इस मानसिकता ने डेरा डाला हुआ है। हमने नौसेना के ध्वज से गुलामी की मानसिकता को हटाया। ये गुलामी की मानसिकता ही है, जिसने राम को नकारा है। भारतवर्ष के कण-कण में भगवान राम हैं। लेकिन, मानसिक गुलामी ने राम को भी काल्पनिक बता दिया। आने वाले एक हजार वर्ष के लिए भारत की नींव तभी मजबूत होगी, जब आने वाले 10 साल में हम मानसिक गुलामी से छुटकारा पा लेंगे।

“राम एक मूल्य हैं, राम एक मर्यादा हैं” – PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘आने वाली सदियां और सहस्र शताब्दियों तक ये धर्म ध्वज प्रभु राम के आर्दशों और सिद्धांतों का उद्घोष करेगा,ये धर्म ध्वज आह्वान करेगा कि सत्य की जीत होती है असत्य की नहीं। ये धर्म ध्वज उद्घोष करेगा कि सत्य ही ब्रह्म का स्वरूप है। सत्य में ही धर्म स्थापित है।

“राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं”- PM मोदी

धर्मध्वज फहराने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा – “हम सब जानते हैं कि हमारे राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं। उनके लिए व्यक्ति का कुल नहीं, उसकी भक्ति महत्वपूर्ण है। उन्हें वंश नहीं, मूल्य प्रिय हैं। उन्हें शक्ति नहीं, सहयोग महान लगता है। हम भी उसी भावना से आगे बढ़ रहे हैं।”

“भगवान राम से सीखने की आवश्यकता”- PM मोदी

“हमें भगवान राम से सीखना चाहिए। राम का अर्थ है मर्यादा, राम का अर्थ है आचरण का सर्वोच्च आदर्श। वे धर्म के मार्ग पर चलने वाले सर्वोच्च सदाचार के प्रतीक हैं।”

सप्त मंदिरों का किया उल्लेख – PM मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि राम मंदिर का यह दिव्य परिसर भारत के सामूहिक शक्ति और सांस्कृतिक एकता की चेतना स्थली बन रहा है। उन्होंने कहा “माता शबरी का मंदिर जनजातीय समाज के प्रेमभाव की प्रतिमूर्ति है,निषादराज का मंदिर सच्ची मित्रता का प्रतीक है। यहां माता अहिल्या, महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य और तुलसीदास के मंदिर भी हैं। जटायु और गिलहरी की मूर्तियां दिखाती हैं कि बड़े संकल्प की सिद्धि के लिए हर छोटा प्रयास भी महत्वपूर्ण होता है।”

“धर्मध्वज बनेगा प्रेरणा”- PM मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि “यह धर्मध्वज प्रेरणा देगा कि प्राण जाए, पर वचन न जाए। यह कर्मप्रधान विश्व की स्थापना का संदेश देगा और समाज में शांति, सद्भाव और सुख का प्रतीक बनेगा।”

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