Sunday, February 8, 2026
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बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की हत्या, मृतक की पहचान अमृत मंडल के रूप में हुई

बांग्लादेश में भीड़ हिंसा की एक और घटना सामने आई है। राजबाड़ी जिले के पांग्शा इलाके में भीड़ ने एक हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान अमृत मंडल उर्फ सम्राट के रूप में हुई है। घटना को लेकर पुलिस ने दावा किया है कि अमृत मंडल पर जबरन वसूली के आरोप थे, जिसके बाद ग्रामीणों ने उसे निशाना बनाया।

पुलिस की कार्रवाई, एक सहयोगी हिरासत में
डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना बुधवार 24 दिसंबर को हुई। पुलिस ने बताया कि हमले की सूचना मिलने पर प्रशासन मौके पर पहुंचा। अमृत मंडल को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मामले में पुलिस ने उसके एक सहयोगी मोहम्मद सलीम को हिरासत में लिया है, जिसके पास से एक पिस्तौल समेत हथियार बरामद होने का दावा किया गया है।

‘सम्राट वाहिनी’ चलाने का आरोप
पुलिस का कहना है कि अमृत मंडल ने कथित तौर पर ‘सम्राट वाहिनी’ नाम से एक संगठन बना रखा था और आसपास के इलाकों में जबरन वसूली करता था। पुलिस के अनुसार, अवामी लीग सरकार के कार्यकाल के दौरान वह भारत भाग गया था और हाल ही में बांग्लादेश लौटा था। अधिकारियों का दावा है कि अमृत मंडल के खिलाफ हत्या समेत दो आपराधिक मामले दर्ज थे और वह उसी गांव का रहने वाला था, जहां उसकी मौत हुई।

ग्रामीणों का बयान
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि अमृत मंडल हुसैनडांगा के पुराने बाजार क्षेत्र में एक व्यक्ति के घर फिरौती मांगने गया था। जब घर के मुखिया ने पैसे देने से इनकार कर दिया, तो कथित तौर पर ‘सम्राट वाहिनी’ के सदस्य 24 दिसंबर को घर में घुस गए। उस वक्त मुखिया घर पर नहीं था, ऐसे में आरोप है कि उसके बेटे के साथ मारपीट की गई। शोर मचने पर गांव वाले मौके पर जुट गए और उन्होंने अमृत मंडल की पिटाई कर दी। उसके एक साथी को भीड़ ने पकड़ लिया।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
इससे पहले बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की भी भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी और बाद में उसके शव को जला दिया गया था। शुरुआती तौर पर उस मामले को ईशनिंदा से जोड़कर देखा गया, लेकिन बाद में पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला। दीपू दास की हत्या के बाद भारत समेत कई देशों में यूनुस सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए थे।

राजबाड़ी की इस ताजा घटना ने एक बार फिर बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था और भीड़ हिंसा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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