Sunday, February 8, 2026
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राज्यसभा में भारी हंगामे के बीच VB–G RAM G बिल पास, विपक्ष का कड़ा विरोध, संसद परिसर में धरना

विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी ‘जी राम जी’ विधेयक लोकसभा के बाद अब राज्यसभा से भी ध्वनि मत से पारित हो गया है। विपक्ष के तीखे विरोध और भारी हंगामे के बावजूद सरकार ने इस विधेयक को मंजूरी दिला दी। बिल के पारित होते ही राज्यसभा की कार्यवाही सुबह 11:00 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इसके विरोध में विपक्षी दलों ने संसद परिसर में संविधान सदन के बाहर धरना-प्रदर्शन भी किया।

मनरेगा की जगह लेगा जी राम जी विधेयक

सरकार के अनुसार, यह विधेयक 20 साल पुरानी मनरेगा (MGNREGA) योजना का स्थान लेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में हर साल 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की गारंटी देगा। सरकार का दावा है कि इस नई योजना का मकसद सिर्फ रोजगार देना नहीं, बल्कि ग्रामीण आजीविका को स्थायी रूप से मजबूत करना है।

विपक्ष के विरोध के बीच केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पुरानी योजना में कई खामियां थीं, जिन्हें दूर करने के लिए यह विधेयक जरूरी था।

विपक्ष का आरोप: राज्यों पर बोझ, मजदूर विरोधी प्रावधान

विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। विपक्ष का कहना है कि- इस योजना से राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा खेती के सीजन में काम की निरंतरता टूटेगी, जिससे मजदूरों को नुकसान होगा मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना गांधी जी के आदर्शों के खिलाफ है इन्हीं मुद्दों को लेकर विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा से वॉकआउट किया और बाद में संविधान सदन के बाहर धरने पर बैठ गए। विपक्ष ने विधेयक को संसदीय सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग भी की।

मल्लिकार्जुन खरगे का सरकार पर हमला

राज्यसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “जिस तरह तीन कृषि कानूनों को सरकार को वापस लेना पड़ा, उसी तरह एक दिन यह कानून भी वापस लेना पड़ेगा। क्या आप आंदोलन, सड़क जाम, गोलियां और मौतें चाहते हैं? तब जाकर कानून वापस लेंगे? लोग इस कानून का कभी समर्थन नहीं करेंगे, हम लड़ते रहेंगे।”

संजय सिंह का तीखा तंज

आप सांसद संजय सिंह ने भी सरकार को घेरते हुए कहा, “80 से ज्यादा देशों में गांधी जी की प्रतिमाएं हैं। गांधी राम भक्त थे। राम के नाम पर राजनीति मत कीजिए। राम भगवान भी अपने भक्त का नाम हटाने से खुश नहीं होंगे। यह योजना राम का सम्मान है या अपमान?”

कुछ दलों ने सशर्त समर्थन जताया

AIADMK सांसद एम. थंबीदुरई ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि 60-40 के प्रावधान पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। बीजेडी सांसद शुभाशीष खूंटिया ने कहा कि नाम बदलने से मजदूरों का भला नहीं होगा और बिल में कई खामियां हैं, इसे सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाना चाहिए। YSRCP के निरंजन रेड्डी ने भी सेलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग की।

शिवराज सिंह चौहान का विपक्ष पर पलटवार

लोकसभा और राज्यसभा में जवाब देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस और विपक्ष पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि- RSS को जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है, जबकि संघ व्यक्ति निर्माण और राष्ट्र सेवा की परंपरा का प्रतीक है हिंदुत्व कोई संकीर्ण विचारधारा नहीं, बल्कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना है शिवराज ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने कभी भी महात्मा गांधी के आदर्शों को ईमानदारी से नहीं अपनाया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद गांधी जी ने कांग्रेस को भंग कर लोकसेवक संघ बनाने की बात कही थी, लेकिन सत्ता की लालसा में ऐसा नहीं किया गया और उसी दिन गांधी जी के आदर्शों की हत्या कर दी गई।

नामकरण की राजनीति पर कांग्रेस को घेरा

नाम बदलने के मुद्दे पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नाम रखने की सनक अगर किसी को है तो वह कांग्रेस है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने योजनाओं और संस्थानों के नाम नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर रखकर राजनीतिक महिमामंडन किया। उन्होंने आंकड़े गिनाते हुए कहा कि दर्जनों योजनाएं, विश्वविद्यालय, सड़कें, अस्पताल, एयरपोर्ट और यहां तक कि 15 नेशनल पार्क भी एक ही परिवार के नाम पर रखे गए।

रोजगार के साथ स्थायी विकास का दावा

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जी राम जी योजना सिर्फ मजदूरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण होगा। योजना के तहत- जल संरक्षण, सिंचाई, तालाब, कुएं ग्रामीण सड़कें, स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन वृक्षारोपण, सोलर लाइट, खेल मैदान महिला सशक्तिकरण और लखपति दीदी अभियान जैसे कार्य किए जाएंगे।

सरकार का दावा: विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम

सरकार का कहना है कि जी राम जी विधेयक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर एक बड़ा कदम है। विकसित गांव के माध्यम से आत्मनिर्भर, समृद्ध और टिकाऊ भारत के निर्माण की परिकल्पना इस योजना की आधारशिला है।

वहीं विपक्ष इसे राज्यों, मजदूरों और गांधी जी के नाम पर राजनीति से जोड़कर देख रहा है। आने वाले दिनों में इस कानून को लेकर देश की सियासत और गरमाने के आसार हैं।

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