Sunday, February 8, 2026
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Uttar Pradesh : अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ पर भव्य उत्सव

रामनगरी अयोध्या एक बार फिर उत्साह और भक्ति में डूबी हुई है। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर पूरा शहर राममय हो गया है। इस साल प्रतिष्ठा द्वादशी और अंग्रेजी नववर्ष का संगम 31 दिसंबर 2025 को पड़ने से भक्तों का उत्साह दोगुना हो गया है। चारों ओर भगवा झंडे लहरा रहे हैं, जय श्रीराम के गगनभेदी जयघोष गूंज रहे हैं और मंदिरों के दर्शन के लिए लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं।

मुख्य अतिथि और सुरक्षा व्यवस्था

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दो साल पूरे होने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। रक्षा मंत्री राम मंदिर परिसर स्थित अन्नपूर्णा मंदिर में ध्वजारोहण करेंगे, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे और श्रद्धालुओं को संबोधित करेंगे।

प्रतिष्ठा द्वादशी का महत्व

भले ही भव्य प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को हुई थी, लेकिन पंचांग के अनुसार इसकी वर्षगांठ पौष शुक्ल द्वादशी को मनाई जाती है, जो इस साल 31 दिसंबर 2025 को पड़ रही है। इसी अवसर पर 29 दिसंबर 2025 से 2 जनवरी 2026 तक अयोध्या में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन किए जा रहे हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

मुख्य आयोजनों में पूजा-अर्चना, हवन, भजन-कीर्तन, राम कथा, रामलीला, रामचरितमानस का पाठ और कवि सम्मेलन शामिल हैं। राम मंदिर परिसर से लेकर अंगद टीला तक श्रद्धालुओं का उत्सव पसरा हुआ है।

भक्तों की भारी भीड़

राम जन्मभूमि मंदिर के साथ-साथ हनुमानगढ़ी, कनक भवन और अन्य प्रमुख मंदिरों में दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालु घंटों कतार में लगकर भगवान राम और बजरंगबली के दर्शन कर रहे हैं। पूरा वातावरण दीपों, भजनों और रामनाम के जाप से आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया है।

सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

VVIP की मौजूदगी और लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए अयोध्या में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। शहर को कई जोनों में बांटकर पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी कर किसी भी प्रकार की परेशानी से बचाव किया जा रहा है।

आस्था, संस्कृति और उत्सव का संगम

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और भारतीय परंपराओं का भव्य उत्सव बन गई है। नए वर्ष के स्वागत और प्रतिष्ठा द्वादशी के पावन अवसर पर अयोध्या में उमड़ा श्रद्धा का यह सैलाब यह संदेश दे रहा है कि रामनगरी न सिर्फ धार्मिक केंद्र है, बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक भी है।

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