Tuesday, February 10, 2026
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सुखबीर बादल पर हुई फायरिंग को लेकर पंजाब के राज्यपाल से मिले एंटी टेररिस्ट फ्रंट इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य, धार्मिक स्थलों पर केंद्रीय सुरक्षा लगाने की रखी मांग

चंद्रशेखर धरणी, चंडीगढ़ : श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश पर पंजाब में अमृतसर के श्री दरबार साहिब में अपनी सजा भुगत रहे अकाली दल नेता सुखबीर सिंह बादल पर हुई फायरिंग को लेकर एंटी टेररिस्ट फ्रंट इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की। इस दौरान शांडिल्य ने सुखबीर बादल पर हुई फायरिंग समेत कई मुद्दों पर उनके साथ चर्चा की। सुखबीर बादल पर हुई फायरिंग के बाद वीरेश शांडिल्य ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से पंजाब के सभी धार्मिक स्थलों पर केंद्रीय सुरक्षा लगाने की मांग करते हुए बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री को धमकी देने वाले कट्टरपंथी बरजिंदर परवाना को भी गिरफ्तार करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने बलवंत सिंह राजोआना को पटियाला से तिहाड़ जेल में शिफ्ट करने की भी मांग की। शांडिल्य ने कहा कि खालिस्तानियों को देखते ही गोली मारने का कानून बनना चाहिए। वीरेश शांडिल्य के साथ बातचीत के बाद राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने एंटी टेररिस्ट फ्रंड के ज्ञापन को कार्रवाई के लिए अपनी अनुशंसा के साथ गृह मंत्रालय और पंजाब सरकार को भेज दिया।

सुखबीर बादल को घोषित किया था तनखैया
अकालत तख्त से सुखबीर बादल को तनखैया घोषित किया है। तनखैया घोषित किए जाने के एक दिन बाद उन्होंने श्री दरबार साहिब के बाहर ‘सेवादार’ के तौर पर काम किया। दोनों नेताओं ने एक घंटे तक ‘सेवादार’ के रूप में काम किया।

क्यों सुनाई थी सजा ?
बता दें कि पंजाब में 2007 से 2017 तक शिरोमणि अकाली दल सरकार की ओर से की गई ‘गलतियों’ के कारण बादल और अन्य नेताओं के लिए ‘तनखैया’ (धार्मिक दंड) की घोषणा करते हुए अकाल तख्त के सिख धर्मगुरु ने सोमवार को वरिष्ठ अकाली नेताओं को ‘सेवादार’ के रूप में सेवा करनेका निर्देश दिया था। आदेश की घोषणा से पहले सुखबीर बादल ने अपनी गलतियों को स्वीकार किया, जिसमें पंजाब में शिअद के शासन के दौरान 2007 के ईशनिंदा मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को माफ करना भी शामिल था।

सुनाई गई है ये सजा
जत्थेदार ने सुखबीर सिंह बादल को एक घंटे तक कीर्तन सुनने की धार्मिक दंड भी दिया है। साथ ही उन्होंने बीबी जागीर कौर, प्रेम सिंह चंदूमाजरा, सुरजीत सिंह रखड़ा, बिक्रम सिंह मजीठिया, महेश इंदर सिंह ग्रेवाल, चरणजीत सिंह अटवाल और आदेश प्रताप सिंह कैरों सहित अन्य अकाली नेताओं को श्री दरबार साहिब में सेवादार के रूप में काम करने का आदेश दिया था।

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