नई दिल्ली में स्थित हिमाचल प्रदेश सरकार का प्रतीकात्मक भवन, जिसे हिमाचल भवन के नाम से जाना जाता है, अब नीलामी के लिए तैयार है। दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में इस भवन की नीलामी का आदेश दिया है, जो राज्य सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। यह आदेश हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा भुगतान न किए गए कर्ज से संबंधित एक मामले में जारी किया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
हिमाचल भवन को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह भवन एक महत्वपूर्ण संपत्ति है जो हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा दिल्ली में अपने प्रशासनिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के संचालन के लिए उपयोग किया जाता था। हालांकि, वर्षों से इस भवन को लेकर आर्थिक विवाद बढ़ते गए, जिसमें बकाया कर्ज और देयताओं का भुगतान न करना मुख्य मुद्दा रहा।
हाई कोर्ट का आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में हिमाचल भवन को नीलाम करने के निर्देश दिए हैं ताकि बकाया राशि का भुगतान किया जा सके। कोर्ट ने यह निर्णय कर्जदाताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए लिया। आदेश में कहा गया कि भवन की नीलामी से प्राप्त धनराशि का उपयोग कर्ज की भरपाई के लिए किया जाएगा।
हिमाचल सरकार की प्रतिक्रिया
हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस निर्णय पर असहमति व्यक्त की है। सरकार का कहना है कि हिमाचल भवन केवल एक संपत्ति नहीं है, बल्कि यह राज्य के सांस्कृतिक और प्रशासनिक महत्व का प्रतीक है। सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की योजना बना रही है ताकि इस आदेश को चुनौती दी जा सके।
सांस्कृतिक महत्व
हिमाचल भवन का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह भवन न केवल राज्य के नागरिकों के लिए एक सहारा था, बल्कि यह हिमाचल प्रदेश की परंपराओं, पर्यटन और कला को बढ़ावा देने का भी केंद्र रहा है। यहां विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों और बैठकों का आयोजन होता था, जो हिमाचल प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में सहायक रहा।



