31 अक्टूबर 2024 को भारत ने अपने महान नेता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सरदार वल्लभभाई पटेल की 149वीं जयंती मनाई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया। सरदार पटेल, जिन्हें “लौह पुरुष” के रूप में जाना जाता है, भारतीय एकता और अखंडता के प्रतीक रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल एक किसान पुत्र थे, जिन्होंने भारत के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: एकता का प्रतीक
“स्टैच्यू ऑफ यूनिटी,” जो कि दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है, 182 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और सरदार पटेल के सम्मान में बनाई गई है। इसे गुजरात के नर्मदा जिले के केवड़िया में स्थापित किया गया है और यह भारतीय एकता का प्रतीक है। इस प्रतिमा के निर्माण में पूरे भारत से किसानों द्वारा दिए गए औजार और लोहे का उपयोग किया गया, जो भारतीय कृषि समाज और उनके योगदान को दर्शाता है। मोदी ने बताया कि यह प्रतिमा केवल एक प्रतिमा नहीं है, बल्कि यह भारत की एकता और विविधता का जिंदा प्रमाण है।
सरदार पटेल: भारत को एकजुट करने वाले नेता
सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्रता के बाद 565 से अधिक रियासतों को भारत में एकीकृत किया। यह एक कठिन कार्य था, लेकिन उनके दृढ़ निश्चय और नेतृत्व के कारण संभव हुआ। उन्होंने अपने नेतृत्व में भारत की रियासतों को एकीकृत करके उन्हें भारत गणराज्य का हिस्सा बनाया, जिससे आज का अखंड भारत बना। सरदार पटेल के अद्वितीय नेतृत्व को देखकर उन्हें “लौह पुरुष” का नाम दिया गया, और आज भी उनका योगदान पूरे देश में सराहा जाता है।
किसान समुदाय से सरदार पटेल का संबंध
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में इस बात का उल्लेख किया कि सरदार पटेल का किसान समुदाय से गहरा संबंध था। एक किसान पुत्र के रूप में, उन्होंने न केवल किसानों की समस्याओं को समझा, बल्कि उनके लिए कई महत्वपूर्ण कदम भी उठाए। बारडोली सत्याग्रह के दौरान पटेल ने किसानों के अधिकारों की रक्षा की और उन्हें उनके अधिकार दिलवाए। उनके इसी संघर्ष और नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें “सरदार” की उपाधि दी गई।
सरदार पटेल की जयंती पर उनकी इस प्रेरणा को याद करना हर भारतीय के लिए महत्वपूर्ण है। उनके विचार और योगदान हमें हमेशा एकता, दृढ़ता, और निष्ठा की शिक्षा देते हैं।



