Monday, February 9, 2026
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चंडीगढ़ में नौकरियों में हिस्से को लेकर गंभीर हुए हरियाणा-पंजाब, गृहमंत्री की अध्यक्षता में बैठक में होगी चर्चा

चंडीगढ़ प्रशासन में लंबे समय से लगातार कम होती जा रही अपनी हिस्सेदारी को लेकर हरियाणा और पंजाब अब गंभीर हो गए हैं। लंबे समय से चल रहे इस विवाद को अब दोनों राज्य उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में उठाएंगे। यह बैठक अगले महीने के पहले सप्ताह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होगी, जिसमें विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और अन्य अधिकारी भाग लेंगे।

हरियाणा ने लिखा पत्र

चंडीगढ़ प्रशासन में हिस्सेदारी को लेकर हरियाणा सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर इस मुद्दे को एनजेडसी बैठक के आधिकारिक एजेंडे में शामिल करने की मांग की है। हरियाणा का कहना है कि चंडीगढ़ प्रशासन में पंजाब और हरियाणा के कर्मचारियों के बीच 60:40 के अनुपात में यथास्थिति बनाए रखी जाए, जिसमें पिछले कुछ वर्षों में बदलाव किया गया है। इसका नतीजा यह हुआ है कि यूटी प्रशासन में प्रतिनियुक्ति पर तैनात हरियाणा और पंजाब के अधिकारियों की हिस्सेदारी कम हो गई है।

हरियाणा-पंजाब को हैं ये आपत्तियां

हरियाणा की ओर से उठाई गई आपत्ति में चंडीगढ़ प्रशासन में हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) अधिकारियों की लगातार कम होती संख्या पर चिंता जताई गई है। इससे पहले यूटी प्रशासन में सात एचसीएस अधिकारी तैनात थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 4 रह गई है। इनमें से दो यूटी प्रशासन और दो चंडीगढ़ नगर निगम में तैनात हैं। हरियाणा का आरोप है कि इस कमी से यूटी प्रशासन में हरियाणा की भागीदारी प्रभावित हुई है। वहीं, पंजाब ने भी इस मुद्दे पर आपत्ति जताई है और बार-बार तर्क दिया है कि यूटी प्रशासन में एजीएमयूटी कैडर के अधिकारियों का दबदबा बढ़ा है।

पंजाब का आरोप है कि चंडीगढ़ प्रशासन के प्रमुख पदों पर पहले पंजाब के अधिकारी काबिज थे, लेकिन अब एजीएमयूटी कैडर के अधिकारियों की संख्या बढ़ रही है। पंजाब ने मांग की है कि यूटी प्रशासन में प्रतिनियुक्ति पर नियुक्तियों का कार्यकाल तय न किया जाए और इसे सामान्य प्रतिनियुक्ति न माना जाए। पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए यूटी प्रशासन में कोटा तय करने के अलावा दोनों राज्यों के अधिकारियों के लिए आरक्षण की भी मांग की गई है। उम्मीद है कि अगले महीने होने वाली वाल्वी एनजेडसी की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है, ताकि इस विवाद का समाधान निकाला जा सके।

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