Saturday, February 7, 2026
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UP News : Noida इंजीनियर मौत मामले में पूरी हुई SIT की जांच, रिपोर्ट ने खोला सिस्टम का काला चिट्ठा

नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। इस मामले की जांच कर रही तीन सदस्यीय एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने साफ तौर पर माना है कि युवराज को बचाने के प्रयासों में गंभीर चूक हुई थी। रिपोर्ट में करीब एक दर्जन अधिकारियों और कर्मचारियों को लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इस घटना की निष्पक्ष जांच के लिए SIT का गठन किया गया था। अब रिपोर्ट सामने आने के बाद दोषी पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों पर निलंबन समेत विभागीय कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

बचाव कार्य में कई एजेंसियों की लापरवाही उजागर

एसआईटी की रिपोर्ट में प्राधिकरण, एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड और पुलिस से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। जांच में पाया गया कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान तालमेल की भारी कमी रही। समिति को प्राधिकरण और पुलिस प्रशासन की ओर से करीब 700 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी गई थी, जिसमें अलग-अलग विभागों ने एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश की।

युवराज को बाहर निकालने में क्यों लगे पूरे दो घंटे?

जांच के दौरान एसआईटी ने जलभराव से जुड़ी व्यवस्थाओं, स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम की प्लानिंग, कंट्रोल रूम की मॉनिटरिंग, रेस्क्यू रिस्पॉन्स टाइम और मौके पर मौजूद अधिकारियों की भूमिका की गहराई से पड़ताल की। सबसे बड़ा और अहम सवाल यही रहा कि हादसे के बाद युवराज को कार से बाहर निकालने में करीब दो घंटे क्यों लग गए।

कैसे हुआ हादसा ?

यह हादसा 16 जनवरी की रात का है। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता गुरुग्राम स्थित अपने ऑफिस से घर लौट रहे थे। घने कोहरे के कारण उनकी कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने एक गहरे गड्ढे में गिर गई। फंसे हुए युवराज ने तुरंत अपने पिता को फोन कर मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद करीब पौने दो घंटे बाद भी उन्हें सुरक्षित बाहर नहीं निकाला जा सका।

घटना के बाद हुआ था भारी हंगामा

इस हादसे के बाद इलाके में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला था। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 20 जनवरी को तीन सदस्यीय एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए थे। अब मंगलवार को एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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