बीते कुछ वर्षों में हुए बुनियादी बदलावों ने वाराणसी को सिर्फ एक धार्मिक नगरी नहीं, बल्कि एक उभरते महानगर की पहचान दी है। वाराणसी में चौड़ी सड़कें, आधुनिक कॉरिडोर और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट इस बात के संकेत हैं कि काशी अब भविष्य के भारत के शहरी मॉडल से जुड़ रही है।
‘ग्रेटर वाराणसी’ का मास्टर प्लान तैयार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजना ‘मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना’ के तहत वाराणसी को नोएडा-ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर विकसित करने की रूपरेखा तैयार की गई है। वर्ष 2031 तक के लिए बने मास्टर प्लान के अनुसार, वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) रिंग रोड के आसपास 1200 एकड़ से अधिक क्षेत्र में छह नई टाउनशिप बसाने की योजना पर काम कर रहा है।
नोएडा मॉडल पर हाई-टेक टाउनशिप
ग्रेटर वाराणसी के तहत हरहुआ से राजातालाब के बीच चार से छह आधुनिक टाउनशिप प्रस्तावित हैं। इन क्षेत्रों में मॉल, फाइव-स्टार होटल, आईटी पार्क, कॉरपोरेट ऑफिस और विश्वस्तरीय अस्पताल विकसित किए जाएंगे। सरकार ने इस परियोजना के लिए शुरुआती तौर पर लगभग 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जबकि भूमि अधिग्रहण और विकास की लागत 6,000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है।
निवेश के लिहाज से क्यों अहम वाराणसी
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि यहां निवेश पर सालाना 15 से 20 प्रतिशत तक का रिटर्न मिल रहा है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बाद शहर में हर साल 10 करोड़ से ज्यादा पर्यटकों का आगमन हो रहा है, जिससे रेंटल प्रॉपर्टी और होम-स्टे सेक्टर को बड़ा लाभ मिला है। इसके अलावा, देश का पहला शहरी रोपवे, गंगा पर नए पुल और मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट टर्मिनल जैसे प्रोजेक्ट्स वाराणसी को एक आधुनिक ट्रांसपोर्ट हब की दिशा में ले जा रहे हैं।



