Sunday, February 8, 2026
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अमेरिका ने WHO से खुद को किया अलग, जिनेवा मुख्यालय के बाहर से हटाया अपना झंडा

अमेरिका ने गुरुवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से आधिकारिक रूप से अलग होने की घोषणा कर दी। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब बीते एक साल से लगातार चेतावनी दी जा रही थी कि अमेरिका का WHO से बाहर जाना न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकता है। अमेरिका ने इस कदम के पीछे कोविड-19 महामारी के दौरान WHO पर कुप्रबंधन और गलत फैसलों का आरोप लगाया है।राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने 2025 के कार्यकाल के पहले ही दिन एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर WHO से बाहर निकलने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जो अब पूरी हो चुकी है।

WHO से सीमित संपर्क में रहेगा अमेरिका

अमेरिकी स्वास्थ्य और विदेश मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि अमेरिका अब WHO के साथ केवल औपचारिक और सीमित संपर्क बनाए रखेगा, ताकि बाहर निकलने की प्रक्रिया पूरी की जा सके। एक वरिष्ठ अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अमेरिका न तो WHO में पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएगा और न ही भविष्य में दोबारा संगठन में लौटने की कोई योजना है।

अमेरिका ने यह भी साफ कर दिया है कि अब वह बीमारियों की निगरानी, महामारी की रोकथाम और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर WHO के बजाय सीधे अन्य देशों के साथ सहयोग करेगा।

बकाया राशि को लेकर टकराव

WHO का दावा है कि अमेरिका पर करीब 260 मिलियन डॉलर (लगभग 2,100 करोड़ रुपये) का बकाया है, जिसमें 2024 और 2025 की फीस भी शामिल है। अमेरिकी कानून के अनुसार, किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था से बाहर निकलने से पहले एक साल का नोटिस देना और सभी बकाया चुकाना जरूरी होता है।

हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने WHO के दावे को खारिज करते हुए कहा कि कानून में यह स्पष्ट नहीं है कि भुगतान किए बिना बाहर नहीं निकला जा सकता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी जनता पहले ही जरूरत से ज्यादा भुगतान कर चुकी है। स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग (HHS) ने पुष्टि की है कि WHO को दी जाने वाली अमेरिकी फंडिंग पूरी तरह रोक दी गई है।

जिनेवा में WHO मुख्यालय से हटाया गया अमेरिकी झंडा

गवाहों के अनुसार, गुरुवार को स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा स्थित WHO मुख्यालय के बाहर से अमेरिकी झंडा हटा दिया गया। इसे अमेरिका के औपचारिक रूप से संगठन से बाहर निकलने का प्रतीक माना जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र से बढ़ती दूरी

हाल के सप्ताहों में अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी अन्य संस्थाओं से भी दूरी बनानी शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप द्वारा प्रस्तावित नया “Board of Peace” संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर कर सकता है।

कुछ WHO आलोचकों ने संगठन के विकल्प के तौर पर एक नई वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी बनाने की भी वकालत की है, हालांकि ट्रंप प्रशासन के एक पुराने प्रस्ताव में WHO में सुधार और अमेरिकी नेतृत्व को मजबूत करने की बात कही गई थी, न कि नई संस्था बनाने की।

वापसी की उम्मीद बेहद कम

WHO प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस सहित कई वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अमेरिका से फैसले पर पुनर्विचार की अपील की थी, लेकिन मौजूदा रुख से साफ है कि निकट भविष्य में वापसी की संभावना बेहद कम है। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ लॉरेंस गोस्टिन ने कहा कि यह कदम अमेरिकी कानून का उल्लंघन हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन इससे बच निकल सकता है।

WHO पर पड़ेगा गहरा असर

अमेरिका के बाहर निकलने से WHO को बड़ा आर्थिक झटका लगा है। अमेरिका अब तक संगठन का सबसे बड़ा फंडिंग स्रोत था और कुल बजट का लगभग 18 प्रतिशत योगदान देता था। फंडिंग बंद होने के बाद WHO को अपने शीर्ष प्रबंधन में कटौती करनी पड़ी है और कई कार्यक्रमों के बजट घटाए गए हैं।

WHO ने संकेत दिया है कि इस साल के मध्य तक करीब 25 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ सकती है।

दुनिया के लिए बढ़ी चिंता

वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का WHO से बाहर जाना पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी है। ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रॉपीज़ की केली हेनिंग ने कहा कि अमेरिका के हटने से बीमारियों की पहचान, रोकथाम और महामारी से निपटने की वैश्विक व्यवस्था कमजोर हो सकती है। यह फैसला न सिर्फ WHO बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के भविष्य पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

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