Notice: Function amp_has_paired_endpoint was called incorrectly. Function called while AMP is disabled via `amp_is_enabled` filter. The service ID "paired_routing" is not recognized and cannot be retrieved. Please see Debugging in WordPress for more information. (This message was added in version 2.1.1.) in /home/mhonecpanel/public_html/news.mhone.in/wp-includes/functions.php on line 6131
भारत का अमेरिका पर तीखा पलटवार, मोदी सरकार ने इन दालों पर लगाया 30% टैरिफ
Sunday, February 8, 2026
Google search engine
HomeCurrent Newsभारत का अमेरिका पर तीखा पलटवार, मोदी सरकार ने इन दालों पर...

भारत का अमेरिका पर तीखा पलटवार, मोदी सरकार ने इन दालों पर लगाया 30% टैरिफ

भारत ने कुछ दिनों पहले अमेरिका से आयात होने वाली दालों पर करीब 30 प्रतिशत दालों पर टैरिफ लगाया था। हालांकि भारत द्वारा इस कदम से अमेरिकी सासंद ने राष्ट्रपति ट्रंप को प्रधानमंत्री मोदी से इस विषय के बारे में बात करने की सलाह भी दी थी।

भारत-अमेरिका व्यापार में दालों की अहमियत

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उपभोक्ता देश है। वैश्विक दाल खपत का करीब 27 प्रतिशत हिस्सा भारत में खपता है। देश में दालें रोजाना के भोजन का मुख्य आधार हैं, लेकिन मानसून की अनिश्चितता और सीमित खेती योग्य भूमि के चलते उत्पादन कई बार मांग से पीछे रह जाता है। इसी वजह से भारत को हर साल बड़ी मात्रा में दालों का आयात करना पड़ता है।

अमेरिका से कौन-कौन सी आती हैं दालें ?

पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका भारत के प्रमुख दाल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है। यलो पीज (पीली मटर), मसूर, चना और सूखी फलियां अमेरिका से भारत भेजी जाती रही हैं। इन दालों की मांग घरेलू खपत के साथ-साथ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में भी रहती है।

30 प्रतिशत टैरिफ लगाने का कारण

भारत ने नवंबर 2025 से अमेरिका से आने वाली दालों पर 30 फीसदी आयात शुल्क लागू किया है। यह फैसला अक्टूबर के अंत में लिया गया था। माना जा रहा है कि यह कदम अमेरिकी टैरिफ नीतियों के जवाब में उठाया गया है, जिससे भारत ने साफ संकेत दिया कि वह अपने किसानों और घरेलू बाजार के हितों से समझौता नहीं करेगा।

भारतीय बाजार में अमेरिकी दालें क्यों महंगी हुईं ?

टैरिफ बढ़ने के बाद अमेरिकी दालें भारतीय बाजार में काफी महंगी हो गई हैं। इससे उनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता घट गई है। नतीजतन, भारतीय आयातक अब कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, रूस और अफ्रीकी देशों जैसे वैकल्पिक बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। 2026 की शुरुआत में अमेरिका से दालों के आयात में गिरावट दर्ज की गई है।

ग्रामीण अमेरिका में बढ़ती चिंता

नॉर्थ डकोटा और मोंटाना जैसे राज्यों में दाल उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर यह टैरिफ लंबे समय तक जारी रहा, तो अमेरिकी किसानों को हर साल 5 से 10 करोड़ डॉलर तक का नुकसान हो सकता है, जिससे बेरोजगारी और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

भारत को दाल आयात करना क्यों है जरूरी ?

बता दें कि भारत अभी पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं हो पाया है। वर्ष 2024-25 में भारत ने रिकॉर्ड 73 लाख टन दालों का आयात किया। घरेलू जरूरतों का करीब 15 से 18 फीसदी हिस्सा अभी भी आयात पर निर्भर है। यही वजह है कि भारत को संतुलन बनाकर चलना पड़ता है, ताकि किसानों को नुकसान न हो और आम लोगों को महंगाई का बोझ न झेलना पड़े।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments