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दिल्ली पर छाया संकट! एक साल में 9,000 से अधिक लोगों की मौत, जानें क्या है वजह
Monday, February 9, 2026
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दिल्ली पर छाया संकट! एक साल में 9,000 से अधिक लोगों की मौत, जानें क्या है वजह

देश की राजधानी दिल्ली की हवा अब सिर्फ स्वास्थ्य के लिए खतरा नहीं, बल्कि जानलेवा बनती जा रही है। दिल्ली सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों ने राजधानी की भयावह स्थिति को उजागर कर दिया है। साल 2024 में दिल्ली में सांस से जुड़ी बीमारियों (Respiratory Diseases) के कारण 9,211 लोगों की मौत हुई है। यह आंकड़ा साल 2023 के मुकाबले काफी ज्यादा है, जब ऐसी बीमारियों से 8,801 लोगों की जान गई थी।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इन मौतों के पीछे अस्थमा, निमोनिया, फेफड़ों का कैंसर और टीबी (Tuberculosis) जैसी गंभीर बीमारियां प्रमुख कारण रहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में लगातार खराब होते वायु गुणवत्ता स्तर और बढ़ते प्रदूषण का सीधा असर लोगों की सांस संबंधी सेहत पर पड़ रहा है।

कुल मौतों में भी बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में दिल्ली में कुल मौतों की संख्या बढ़कर 1.39 लाख हो गई, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 1.32 लाख था। यानी राजधानी में 2024 के दौरान हर दिन औसतन **381 लोगों की मौत हुई, जबकि 2023 में यह औसत 363 मौतें प्रतिदिन था।

दिल और रक्त संचार से जुड़ी बीमारियां बनीं सबसे बड़ा कारण

आंकड़ों से पता चलता है कि मौतों का सबसे बड़ा कारण सर्कुलेटरी सिस्टम (Circulatory System) यानी दिल और रक्त संचार से जुड़ी बीमारियां रहीं। 2024 में इन बीमारियों के कारण **21,262 लोगों** की जान चली गई। इसके अलावा, संक्रामक और परजीवी रोगों (Infectious and Parasitic Diseases) से 16,060 मौतें दर्ज की गईं। वहीं मानसिक और व्यवहार संबंधी विकारों के चलते 62 लोगों की मौत हुई।

जन्म दर घटी, मृत्यु दर बढ़ी

दिल्ली के जनसांख्यिकीय आंकड़ों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। एक ओर जहां मौतों में बढ़ोतरी हुई है, वहीं जन्म दर में गिरावट दर्ज की गई है। साल 2024 में दिल्ली में 3,06,459 बच्चों का जन्म हुआ, जो 2023 के 3,15,087 जन्मों के मुकाबले 8,628 कम है। 2024 में प्रतिदिन औसतन 837 बच्चों का जन्म हुआ, जबकि 2023 में यह संख्या 863 थी। जन्म दर घटकर प्रति 1,000 आबादी पर 14 रह गई, जो 2023 में 14.66 थी। वहीं, मृत्यु दर बढ़कर 6.37 हो गई, जो पिछले साल 6.16 थी।

पुरुषों की मौतें ज्यादा

कुल रजिस्टर्ड मौतों में 85,391 पुरुष, 54,051 महिलाएं और 38 अन्य जेंडर के लोग शामिल थे। इनमें से 90,883 मौतों को चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित (Medically Certified) किया गया।

प्रदूषण से गहराता संकट

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में श्वसन रोगों से होने वाली मौतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का सीधा संबंध राजधानी के खतरनाक वायु प्रदूषण से है। हर साल सर्दियों के मौसम में दिल्ली की हवा बेहद जहरीली हो जाती है, जिसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर पड़ता है।

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