मनरेगा में बदलाव के बाद केंद्र सरकार अब UPA सरकार के समय बनाए गए दो प्रमुख सामाजिक कानूनों शिक्षा का अधिकार (RTE) और खाद्य सुरक्षा कानून (NFSA) में सुधार की तैयारी में जुट गई है।
सभी पात्र लोगों को मिले योजना का लाभ
सरकार का उद्देश्य है कि इन योजनाओं का लाभ सिर्फ पात्र लोगों तक सही तरीके और समय पर पहुंचे और सभी लाभार्थियों का 100% रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित किया जाए। सरकार सबसे पहले नियमों और प्रशासनिक आदेशों के जरिए बदलाव लागू करने की कोशिश करेगी। हालांकि इन बदलावों के बाद भी अच्छे परिणाम नहीं मिलते, तो संसद में नया बिल पेश किया जा सकता है।
UPA सरकार के कानूनों की तीन प्रमुख कमियां
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मनमोहन सिंह सरकार के समय बनाए गए अधिकार-आधारित कानूनों में कुछ मूलभूत खामियां रहीं
- शिक्षा का अधिकार कानून हर बच्चे को शिक्षा दिलाने में पूरी तरह सफल नहीं रहा।
- खाद्य सुरक्षा कानून के बावजूद हर जरूरतमंद परिवार तक अनाज नहीं पहुंच पाया।
- कई योजनाओं में लाभार्थियों की सटीक पहचान और निगरानी की व्यवस्था कमजोर रही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी सामाजिक योजनाओं के लाभार्थियों का पूरा डिजिटल रजिस्ट्रेशन किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि एक भी पात्र व्यक्ति वंचित न रहे।
क्या है शिक्षा का अधिकार कानून 2009
भारत में 6 से 14 वर्ष तक के हर बच्चे को फ्री शिक्षा का संवैधानिक अधिकार मिला। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21(A) के तहत दिया गया है और 1 अप्रैल 2010 से पूरे देश में लागू हुआ। हालांकि, यह कानून कॉलेज या विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा पर लागू नहीं होता और 14 वर्ष से अधिक आयु के छात्रों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
क्या है खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013
2013 में जब UPA सरकार थी, तो इस दौरान राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) को पारित किया गया। जिसने भोजन को एक कानूनी अधिकार बना दिया। इसके तहत पात्र लोगों को चावल ₹3, गेहूं ₹2 और मोटे अनाज ₹1 प्रति किलोग्राम के हिसाब से सरकार मुहैया कराने लगी।



