12 जनवरी का दिन भारत की कूटनीति और दीर्घकालिक रणनीति के लिहाज से खास महत्व रखता है। एक ओर देशभर में स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाई जा रही थी, वहीं दूसरी ओर राजधानी नई दिल्ली में भारत-जर्मनी संबंधों को नई दिशा देने वाली अहम बातचीत हो रही थी।
जर्मन चांसलर की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने ऐसे समझौतों पर सहमति जताई, जिनका सीधा असर भारत की सुरक्षा, शिक्षा और तकनीकी भविष्य पर पड़ने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर की इस मुलाकात में केवल औपचारिक चर्चा नहीं हुई, बल्कि रक्षा से लेकर सेमीकंडक्टर तक, आने वाले समय की चुनौतियों से निपटने का स्पष्ट रोडमैप भी तैयार किया गया।
भारत-जर्मनी के बीच हुए चार बड़े समझौते
इस उच्चस्तरीय बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि वे चार अहम समझौते (MoUs) रहे, जिन पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए-
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सबसे प्रमुख समझौता क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर से जुड़ा है। आज के तकनीकी युग में सेमीकंडक्टर मोबाइल फोन से लेकर आधुनिक हथियार प्रणालियों तक की रीढ़ बन चुके हैं। ऐसे में जर्मनी के साथ साझेदारी भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूती देने वाली मानी जा रही है।
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दूसरा महत्वपूर्ण कदम रक्षा सहयोग को लेकर उठाया गया, जहां दोनों देशों ने एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि रक्षा और सुरक्षा में सहयोग आपसी विश्वास का सबसे मजबूत आधार है। इसके तहत भारत और जर्मनी अब रक्षा व्यापार को बढ़ाने के लिए एक ठोस और व्यावहारिक रोडमैप तैयार करेंगे।
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तीसरा समझौता उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हुआ है, जिससे भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए जर्मनी में नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
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चौथा समझौता आयुर्वेद से जुड़ा है, जिसके जरिए भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
आतंकवाद और वैश्विक संकटों पर भी मंथन
यह मुलाकात केवल आर्थिक या तकनीकी साझेदारी तक सीमित नहीं रही। प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर ने वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया। यूक्रेन और गाजा में जारी संघर्षों पर दोनों नेताओं ने अपने-अपने दृष्टिकोण साझा किए। इस दौरान पीएम मोदी ने आतंकवाद पर सख्त रुख दोहराते हुए इसे पूरी मानवता के लिए गंभीर खतरा बताया।
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